चीन को काबू करने में अहम भूमिका निभाने वाले इस द्वीप पर केंद्रित होगी मोदी-जॉनसन की वार्ता, भारत से मदद की आस में ब्रिटेन

By अभिनय आकाश | Apr 21, 2022

चीन के विदेश मंत्री का अचानक भारत दौरा, फिर रूस के विदेश मंत्री का भारत की विदेश नीति और राजनीतिक स्टैंड का गुणगान। अमेरिका और भारत के बीच टू प्लस टू वार्ता। इतना ही नहीं 21 अप्रैल यानी आज से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भारत दौरे पर हैं। यह विदेशी नेताओं के बीते 1 महीने की भारत यात्राओं की लिस्ट नहीं बल्कि रूस यूक्रेन युद्ध और दुनिया में अचानक बदलते समीकरण के बीच भारत की अहमियत की बानगी भर है। 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का भारत दौरा एक द्वीप पर केंद्रित रहने वाला है,जो चीन को काबू करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। बोरिस जॉनसन यात्रा के दौरान मॉरीशस के चागोस में डिएगो गार्सिया द्वीप को लेकर चर्चा करेंगे जिसे मॉरीशस की आजादी के बाद ब्रिटेन ने अपने कब्जे में रखा और फिर 1966 में मोटा पैसा लेकर अमेरिका को लीज पर दे दिया। अभी कुछ ही दिन पूर्व मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण जगन्नाथ 17 अप्रैल को 8 दिवसीय यात्रा पर भारत आए थे। 

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दोनों देशों ने तैनात किया वायुसेना-नौनेसा का बेड़ा

इस द्वीप को लेकर अमेरिका ब्रिटेन भारत और चीन इतने उतावले क्यों है इसका पता इस बात से चलता है कि साल 1965 में मॉरीशस को आजाद करने के बाद ब्रिटेन ने हिंद महासागर में मौजूद दीप समूह को मॉरीशस से अलग कर दिया। हालांकि आज भी मॉरीशस इस द्वीप पर अपना अधिकार जताता है। 1966 में अमेरिका ने ब्रिटेन से समझौता के तहत 50 सालों के लिए चागोस के डिएगो गार्सिया द्वीप को लीज पर ले लिया। दोनों देशों ने यहां वायुसेना और नौसेना बेड़ा तैनात किया।

चीन की दुखती रग

हिंद महासागर के मध्य मैं स्थित जिओ के गाछिया द्वीप समूह का रणनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस दीप की भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। यहां स्थित देश का इस्तेमाल अमेरिका ने इराक की रानी युद्ध के दौरान किया था। चीन अमेरिकी तैनाती को लेकर मिलाया रहता है एशिया में चीन को काबू करने में अहम भूमिका है।

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भारत की भूमिका

अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल की इन सब में भारत की क्या भूमिका है। बता दें कि मॉरीशस का सांस्कृतिक रूप से भारत से गहरा जुड़ाव रहा है। मॉरीशस की अधिकांश आबादी भारतीय मूल की है। इसके अतिरिक्त आर्थिक रूप से भी भारत मॉरीशस की सहायता करता आया है। ऐसे में ब्रिटेन की चाहत ये है कि भारत अपने प्रभाव से हिन्द महासागर में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को चीन से टक्कर लेने हेतु महत्वपूर्ण मानते हुए डिएगो गार्सिया के लिए मॉरीशस संग बातचीत का मार्ग खोले। 

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