By नीरज कुमार दुबे | Oct 12, 2026
इधर INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राष्ट्रीय राजधानी में ‘चलो दिल्ली’ मार्च निकाला और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। उधर, मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के. चंद्रू का वह बयान अचानक चर्चा में आ गया जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि जजों की नियुक्ति प्रधानमंत्री मोदी खुद करते हैं।
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इसी बीच, चेन्नई में आयोजित ‘Who Will Judge the Judges’ परिचर्चा में मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के. चंद्रू की ओर से न्यायिक नियुक्तियों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाने वाला बयान चर्चा में आ गया। उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली को अपारदर्शी बताते हुए कहा कि देश में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया आम लोगों की जानकारी से बाहर रहती है। उनका सवाल था कि आखिर न्यायाधीशों की नियुक्ति करने वाली व्यवस्था को जवाबदेह कौन बनाएगा? मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के. चंद्रू ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्तियां कॉलेजियम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जजों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। चंद्रू के मुताबिक, इसके बाद सरकार ने इस आयोग को दोबारा बनाने की जरूरत ही नहीं समझी, क्योंकि उसे जजों की नियुक्तियों को प्रभावित करने के इससे भी ज्यादा कारगर रास्ते मिल गए थे।
दूसरी ओर, विपक्ष के आज के आंदोलन पर भाजपा ने पलटवार करते हुए इसे ड्रामा बताया है। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पिछले कई वर्षों से कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रही है। हद तो ये हो गई कि पार्टी चुनाव की हार का दोष भी संवैधानिक संस्थानों पर मढ़ती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हार का सिलसिला लगातार जारी है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी उपचुनाव में क्या हुआ? असम में कांग्रेस की स्थिति क्या है? स्थानीय निकाय चुनाव में त्रिपुरा में क्या हुआ, राजस्थान में क्या हुआ, उससे पहले हिमाचल में क्या हुआ? एक के बाद एक चुनाव में हारना और उसकी खीज आंदोलन कर सड़कों पर निकालना, ये कांग्रेस की नियति बन गई है। उन्होंने कहा कि लेकिन आज मैं कांग्रेस के मित्रों से कहना चाहता हूं कि कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं है, कांग्रेस की हार का कारण कांग्रेस का विचार शून्य नेतृत्व है।