By अंकित सिंह | Feb 16, 2021
इस साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव होने है। सबकी दिलचस्पी इसी बात में है कि आखिर इस बार पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार होगी। क्या ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने में कामयाब हो पाएंगी या फिर भाजपा को उसके मेहनत का परिणाम मिलेगा? ममता बनर्जी जहां लोगों को लुभाने के लिए नए-नए योजनाओं की शुरुआत कर रही हैं और अपने कामों को गिनवा रही हैं। वहीं भाजपा ममता सरकार पर भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रही है। ममता बनर्जी और पार्टी के सभी बड़े नेता प्रचार-प्रसार में जुट गए हैं। भाजपा की ओर से भी केंद्रीय नेतृत्व लगातार पश्चिम बंगाल पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा हो या फिर गृह मंत्री अमित शाह, इसके अलावा कई बड़े मंत्री भी लगातार पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा रहे हैं और वहां चुनावी प्रचार कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बंगाल में बिगुल किसका बजेगा?
बात अगर भाजपा की करें तो उसे 117 सीटें ही मिलती दिख रही है। इस ओपिनियन पोल के मुताबिक 117 सीटों के साथ भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बनने जा रही है। 2016 के मुताबिक एक जबरदस्त फायदा होता हुआ दिखाई दे रहा है। 2016 में भगवा पार्टी को सिर्फ 3 सीटें ही मिल पाई थी। भाजपा को उम्मीद है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे वैसे वैसे उसके वोटों में इजाफा होगा और उनकी पार्टी ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर दे पाएगी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18 सीटें मिली थी। पार्टी के वोट परसेंटेज में भी इजाफा देखा जा रहा है। अब बात तीसरे विकल्प यानी कि कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन की करे तो इस गठबंधन को महज 24 सीटें ही मिलती दिखाई दे रही है। 2016 में गठबंधन को 44 सीटें मिली थी। अन्य के खाते में 2 सीटें जाती दिखाई दे रही है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जाहिर सी बात है कि भाजपा ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देती दिखाई दे रही है। हालांकि, भाजपा के उखाड़ फेंकने वाले दावे पर फिलहाल सहमत नहीं है तभी तो टीएमसी को 151 सिल पर मिलती दिख रही है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी एक बार सत्ता में फिर से काबिज हो सकती है। हालांकि यह बात भी गौर करने वाली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी चुनाव प्रचार में नहीं गए हैं। बिहार चुनाव में भी हमने देखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अकेले ही चुनाव का रुख मोड़ दिया था। ऐसे में पीएम के चुनावी मैदान में उतरने के बाद नतीजों में बदलाव देखने को मिल सकता है और शायद भाजपा इसी की उम्मीद भी कर रही है।