दिमागी नक्सल पर Modi के बयान से सियासी घमासान, BJP ने P Chidambaram पर साधा निशाना

By अंकित सिंह | Aug 17, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर पलटवार किया है। त्रिवेदी ने चिदंबरम के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें "दिमागी नक्सल" होने पर गर्व है। बीजेपी नेता ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के उस बयान का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या वह सिंह के आकलन से सहमत है या चिदंबरम के हालिया बयान से।

बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पार्टी को हैरानी है कि चिदंबरम ने मोदी के स्वतंत्रता दिवस वाले बयान पर 24 घंटे के अंदर ही जवाब दे दिया। त्रिवेदी ने कहा कि चिदंबरम ने असल में मोदी के इस्तेमाल किए गए शब्द से खुद को जोड़ लिया है। उन्होंने कांग्रेस से साफ़ करने को कहा कि वह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नक्सलवाद पर किए गए आकलन को सही मानती है या चिदंबरम के हालिया रुख को। बीजेपी प्रवक्ता ने 13 अप्रैल, 2006 के सिंह के उस बयान का ज़िक्र किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद को देश के सामने आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती बताया था।

त्रिवेदी ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के कामकाज की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि UPA के कार्यकाल में नक्सलवाद कई ज़िलों में फैल गया था और 2010 के दंतेवाड़ा हमले का ज़िक्र किया, जिसमें CRPF के कई जवान मारे गए थे। उन्होंने उस दौरान आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत के आँकड़े भी पेश किए और तर्क दिया कि पिछली सरकारों के समय नक्सल समस्या का दायरा कहीं ज़्यादा बड़ा था। ये आँकड़े और आरोप कांग्रेस के प्रति त्रिवेदी की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थे और उनकी बातों में इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई थी।

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त्रिवेदी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार नक्सलवाद के भौगोलिक दायरे को कम करने में सफल रही है और तर्क दिया कि जो इलाके पहले उग्रवाद से प्रभावित थे, उन्हें अब नक्सल-प्रभावित श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने मौजूदा स्थिति की तुलना UPA के दौर में "रेड कॉरिडोर" कही जाने वाली स्थिति से की। BJP नेता ने माओवादी नेताओं के उन पुराने बयानों का भी ज़िक्र किया जिनमें दिल्ली की ओर अपना प्रभाव बढ़ाने की बात कही गई थी, और तर्क दिया कि नक्सल-प्रभावित इलाकों में कमी यह दिखाती है कि सरकार सशस्त्र नक्सलवाद से निपटने में सफल रही है।

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