बंगाल में मोदी-शाह ने जमकर की मेहनत फिर भी नहीं मिली पार्टी को जीत, यह रहे भाजपा के हार के कारण

By अंकित सिंह | May 03, 2021

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए है। नतीजों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर से जीत की हैट्रिक लगाई है जबकि 200 पार का दावा करने वाली भाजपा 80 पार भी नहीं कर सकी है। हालांकि भाजपा की ओर से खूब मेहनत की गई थी। भाजपा अपने प्रेरणास्रोत श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्म स्थान में कमल खिलाने के लिए अत्यधिक उत्सुक थी। परंतु कहीं ना कहीं चुनावी नतीजों से उसे बड़ा झटका लगा है। भगवा दल ने पूरी मजबूती के साथ पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ा पर सफलता नहीं मिल पाई। हां, एक बात जरूर है कि अगर दूसरे मायने से देखें तो भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल में बड़ी सफलता हासिल हुई है। 3 सीटों वाली भाजपा इस बार के विधानसभा चुनाव में 77 सीटों पर पहुंच गई है। हालांकि 200 प्लस का उसका सपना पूरी तरह से टूट चुका है। भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में 200 बार का लक्ष्य लेकर उतरी थी। इसके लिए  लोक लुभावने वादे तो किए ही गए थे, साथ ही साथ भाजपा की ओर से पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ा गया था।

इसे भी पढ़ें: भाजपा बंगाल में बनी प्रमुख विपक्षी पार्टी, करते रहेंगे विचारधारा का विस्तार: नड्डा

वर्तमान परिस्थिति में देखें तो भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी है। हालांकि लोकसभा चुनाव की तुलना में उसके वोट प्रतिशत कम हुए हैं। लोकसभा में पार्टी ने 40.6% मत हासिल किए थे जो कि इस बार 38.1% के आसपास रहा। तृणमूल कांग्रेस ने अपने मत प्रतिशत में लोकसभा चुनाव की तुलना में भारी बढ़ोतरी की है और उसे इस बार 47.9% वोट मिले जबकि लोकसभा चुनाव में उसे 45.7% मिले थे। लगभग 2 सालों तक पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए कड़ी मेहनत करने वाले राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस के शानदार जीत के लिए श्री दिया और कहा कि भाजपा हार पर आत्म निरीक्षण करेगी। भाजपा को यह भी लगता है कि ममता बनर्जी के बाहरी बनाम बंगाली अभियान ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया। बंगाल की जनता ने तो केंद्रीय भाजपा नेताओं की शानदार उपस्थिति देखी परंतु स्थानीय स्तर पर कोई भी नेता स्टार प्रचारक के रूप में उनके बीच नहीं गया।

इसे भी पढ़ें: केरल में अपनी एकमात्र सीट भी जीतने में नाकाम रही भाजपा, श्रीधरन एवं राज्य प्रमुख भी हारे

पार्टी के एक नेता ने इस बात को स्वीकार किया कि चुनावी रणनीति को दुरुस्त करने के लिए राज्य इकाई के नेताओं को विश्वास में नहीं लिया गया। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने के लिए बंगाल में एंटी रोमियो स्क्वायड स्थापित करने का वादा किया जो कि काम नहीं आया। भाजपा ने इस बात को भी स्वीकार किया कि मुस्लिम वोट एक पक्ष होकर तृणमूल के खाते में गया लेकिन बहुसंख्यक हिंदू समुदाय ने धार्मिक लाइनों पर वोट नहीं दिया। पार्टी के कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि दूसरे दलों से आए दागी नेताओं की वजह से भी हमें वोटरों ने खारिज किया। पार्टी नेता मानते हैं कि जब हमने दूसरे दलों के दागी नेताओं को लिया तो लोगों के अंदर यह संदेश गया कि हम भी अलग नहीं है।

प्रमुख खबरें

भारत की बिजली क्षमता 2047 तक 2000 गीगावाट के पार पहुंचेगी, सौर ऊर्जा की होगी अहम भूमिका

SC से छात्रों को बड़ी राहत! सरकार ने FIR रद्द करने के फैसले का किया स्वागत, नड्डा बोले- छात्रों का भविष्य प्राथमिकता

Hanuman Ansh का मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान भजन वायरल, ट्रेन में गाना गाने वाले गायक Suneel Lodhi को मिली नई पहचान

Famous Temple: देश के 10 Famous Krishna Temples जहां दर्शन मात्र से पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना