By अंकित सिंह | Aug 22, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संसद में हाल ही में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक का बचाव किया, जो केंद्र को जेल में बंद किसी भी मंत्री को बर्खास्त करने का अधिकार देता है। बिहार के गयाजी में एक रैली में बोलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी को 50 घंटे की जेल होती है, तो उसे नौकरी से निलंबित कर दिया जाता है। उन्होंने पूछा कि ऐसा ही नियम प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों पर क्यों नहीं लागू होना चाहिए।
मोदी ने कहा कि राजद, कांग्रेस और वामपंथी दल इस कानून का विरोध कर रहे हैं। वे बहुत गुस्से में हैं। कौन नहीं जानता कि वे किससे डरते हैं?... उन्हें लगता है कि अगर वे जेल गए, तो उनके सारे सपने चकनाचूर हो जाएंगे। वे इतने घबराए हुए हैं कि वे एक ऐसे कानून का विरोध कर रहे हैं जो जनहित में है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसा कानून लाई है, जिसके दायरे में देश का प्रधानमंत्री भी आता है। इस कानून में मुख्यमंत्री और मंत्री भी शामिल किए गए हैं। इस कानून के बनने के बाद, अगर कोई मुख्यमंत्री, मंत्री या प्रधानमंत्री गिरफ्तार होता है, तो उसे 30 दिन के भीतर जमानत लेनी होगी, और अगर जमानत नहीं मिली तो 31वें दिन उसे कुर्सी छोड़नी पड़ेगी।
विपक्ष पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश में चाहे कांग्रेस हो या आरजेडी, इनकी सरकारों ने कभी जनता के पैसों का मोल नहीं समझा… इनके लिए जनता के पैसों का मतलब सिर्फ अपनी तिजोरी भरना रहा है। इसी वजह से इनकी सरकारों में सालों-साल तक परियोजनाएँ पूरी नहीं होती थीं। कोई योजना जितनी लटकती थी, ये उतना ही पैसा उसमें कमा लेते थे। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों में हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा, जबकि आज़ादी के बाद कांग्रेस की सरकारें जो 60–65 साल तक सत्ता में रहीं, उनके भ्रष्टाचारों की एक लंबी सूची है। आरजेडी का भ्रष्टाचार तो बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है। मेरा साफ मानना है कि अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना है, तो कोई भी कार्रवाई से बाहर नहीं होना चाहिए।