PMO में कल आखिरी Cabinet Meeting करेंगे Modi, उसके बाद रचा जायेगा नया इतिहास

By नीरज कुमार दुबे | Feb 12, 2026

पिछले पाँच दशकों से अधिक समय तक देश के नीतिगत और रणनीतिक फैसलों का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) नए निर्मित ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में स्थानांतरित हो रहा है। शुक्रवार दोपहर यह ऐतिहासिक बदलाव औपचारिक रूप से शुरू होगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साउथ ब्लॉक में अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सूत्रों के अनुसार, यह कैबिनेट बैठक साउथ ब्लॉक में होने वाली आखिरी उच्चस्तरीय बैठक होगी। इसके तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री और शीर्ष नौकरशाह साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ परिसर के लिए रवाना होंगे। सेवा तीर्थ, जो रायसीना हिल स्थित प्रतिष्ठित इमारत से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर बना है, अब देश के प्रशासनिक संचालन का नया केंद्र बनने जा रहा है।

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हम आपको बता दें कि कैबिनेट सचिवालय पहले ही राष्ट्रपति भवन से सेवा तीर्थ-2 में स्थानांतरित हो चुका है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय सरदार पटेल भवन से सेवा तीर्थ-3 में शिफ्ट होने की प्रक्रिया में है। यह पूरा इलाका अब नए ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ सरकार के शीर्ष कार्यालय एकीकृत ढांचे में काम करेंगे।

हम आपको बता दें कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुआ था। रायसीना हिल पर स्थित ये दोनों इमारतें लंबे समय तक भारत की सत्ता का प्रतीक रही हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय का इतिहास भी दिलचस्प रहा है। 1947 में इसे ‘प्रधानमंत्री सचिवालय’ (पीएमएस) के रूप में एक छोटे प्रशासनिक सहयोगी ढांचे के तौर पर शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री को बुनियादी प्रशासनिक सहायता प्रदान करना था।

1964 में लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएमएस को ‘एलोकेशन ऑफ बिजनेस रूल्स’ के तहत वैधानिक दर्जा मिला, जिससे इसकी संरचना और अधिकारों में बड़ा बदलाव आया। बाद के वर्षों में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में इस कार्यालय की शक्ति और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 1977 में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रित्व काल में इसका नाम बदलकर औपचारिक रूप से ‘प्रधानमंत्री कार्यालय’ (पीएमओ) कर दिया गया।

अब पीएमओ के स्थानांतरण के बाद रक्षा और विदेश मंत्रालय भी आने वाले हफ्तों में साउथ ब्लॉक से अन्य दफ्तरों में शिफ्ट होंगे। इस क्रमिक बदलाव का अर्थ है कि देश की सत्ता का पारंपरिक केंद्र पूरी तरह रायसीना हिल से बाहर स्थानांतरित हो जाएगा। उधर, नॉर्थ ब्लॉक को पहले ही पूरी तरह खाली कर दिया गया है। वहाँ स्थित मंत्रालय अब कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) के आसपास बने नए भवनों में काम कर रहे हैं। यह व्यापक पुनर्संरचना केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक, सुगठित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सेवा तीर्थ जैसे आधुनिक परिसरों में स्थानांतरण से मंत्रालयों के बीच समन्वय बेहतर होगा, सुरक्षा व्यवस्थाएँ मजबूत होंगी और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। वहीं, साउथ और नॉर्थ ब्लॉक जैसी ऐतिहासिक इमारतें भविष्य में विरासत स्थलों के रूप में संरक्षित किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। बहरहाल, साउथ ब्लॉक से पीएमओ का जाना केवल एक कार्यालय का स्थानांतरण नहीं, बल्कि भारत की प्रशासनिक संरचना के एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।

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