Mohan Bhagwat का बड़ा बयान: 'जाति, धर्म से नहीं, इंसानियत से पहचान', देश में एकता पर ज़ोर

By Ankit Jaiswal | Jan 01, 2026

देश में हाल के दिनों में बढ़ती सामाजिक तनाव की घटनाओं के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एकता और आपसी सम्मान पर ज़ोर दिया है। छत्तीसगढ़ के सोनपैरी गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सभी का है और किसी को भी जाति, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार, मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सौहार्द की पहली शर्त यह है कि मन से भेदभाव को खत्म किया जाए और सभी को अपना समझा जाए। उन्होंने कहा कि पूरा देश हम सबका है और यही भावना असली सामाजिक एकता की पहचान है।

उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों तक सभी की समान पहुंच होनी चाहिए और इसे विवाद का विषय नहीं बल्कि एकजुटता का प्रतीक समझा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यही संविधान की मूल भावना भी है।

गौरतलब है कि अपने संबोधन में भागवत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे हालात में आत्ममंथन और समाधान की सोच जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर समाज अंदर से मजबूत होगा तो कोई संकट उसे डिगा नहीं सकता।

धर्मांतरण के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि समाज में आपसी विश्वास की कमी इसके पीछे एक बड़ा कारण है और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़कर ही इस भरोसे को दोबारा मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने अंत में कहा कि आपसी समझ, विश्वास और समानता ही समाज को स्थिर और सुरक्षित बनाती है और यही रास्ता देश को आगे ले जाएगा हैं।

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