By नीरज कुमार दुबे | Sep 01, 2026
मुस्लिमों के बारे में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान सामने आते ही भाजपा ने मुस्लिमों को चुनावी टिकट थमाने शुरू कर दिये हैं। हम आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में धार्मिक सद्भाव और मुस्लिमों की भारत में जगह को लेकर जो संदेश दिया, उसके लगभग समानांतर भाजपा का जयपुर नगर निगम चुनाव में आठ मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारना राजनीतिक हलकों में नई बहस का विषय बन गया है। सवाल यह है कि क्या यह केवल स्थानीय चुनावी गणित है या भाजपा और संघ के व्यापक राजनीतिक-सामाजिक संदेश में किसी बदलाव का संकेत है?
भागवत ने एक पुराने संवाद का भी उल्लेख किया, जिसमें कुछ मुस्लिम भाइयों ने उनसे पूछा था कि आरएसएस हिंदू संगठन है, वह हिंदू राष्ट्र की बात करता है, तो फिर मुस्लिमों का क्या होगा? क्या उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा? भागवत के अनुसार, उनका जवाब साफ था, “नहीं, यह हिंदुत्व नहीं है।” उन्होंने इससे भी आगे बढ़कर कहा कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू हो ही नहीं सकता।
आरएसएस प्रमुख ने हरियाणा के दादरी के निकट 1996 की भयावह विमान दुर्घटना का उदाहरण भी दिया। यह विमानन इतिहास की सबसे घातक मध्य-आकाशीय टक्करों में गिनी जाती है, जिसमें सऊदी अरब एयरलाइंस और कजाखस्तान एयरलाइंस के विमान टकरा गए थे और सभी 349 यात्रियों एवं चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी। भागवत ने कहा कि बड़ी संख्या में मृतक मुस्लिम थे, लेकिन सबसे पहले पहुंचे स्वयंसेवकों ने यह नहीं देखा कि पीड़ित किस धर्म के हैं। उन्होंने घायलों की सहायता की, शवों को निकाला और अंतिम संस्कार सहित अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक सेवा करते समय यह नहीं सोचते कि सामने वाला मुस्लिम है या किसी अन्य समुदाय से। उन्होंने कहा, उस समय प्रमुख रूप से काम करने वाला संगठन आरएसएस था और संघ ने यह काम किसी राजनीतिक लाभ या बदले की अपेक्षा से नहीं किया। उनका संदेश था, “हम केवल देते हैं, बदले में कुछ नहीं चाहते”।
इधर, भारत में भाजपा ने अपने हालिया चुनावी रुख से अलग कदम उठाया है। 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं देने वाली भाजपा ने जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए आठ मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा को परंपरागत रूप से मुस्लिम मतदाताओं के बीच सीमित समर्थन मिलने की बात कही जाती रही है।
भाजपा ने वार्ड 117 से शबाब जहां को फिर टिकट दिया है। वह 2020 के नगर निगम चुनाव में भी पार्टी की उम्मीदवार थीं, हालांकि तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उनके अलावा अफसाना को वार्ड 146, मिजान मिर्जा को 136, रहीस मंसूरी को 137, माजिद पठान को 128, फरीउद्दीन को 113, जाकिर खान को 109 और शहनवाज अंसारी को वार्ड 19 से उम्मीदवार बनाया गया है।
भाजपा का तर्क है कि उम्मीदवारों के चयन में संबंधित वार्डों की मतदाता संरचना को ध्यान में रखा गया है और पार्टी को भरोसा है कि विकास के आधार पर मुस्लिम मतदाता भी उसका समर्थन करेंगे। भाजपा प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा कि पार्टी को अपने विकास कार्यों पर विश्वास है।
वहीं भाजपा उम्मीदवार भी इसी लाइन को आगे बढ़ा रहे हैं। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला पदाधिकारी की पत्नी और पिछले 15 वर्षों से भाजपा से जुड़ीं शबाब जहां का कहना है कि मुस्लिमों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई समस्या नहीं है और उनके क्षेत्र में मुख्य मुद्दा नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा होगा। माजिद पठान ने भी प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका लाभ मुस्लिम समुदाय सहित आम लोगों को मिला है। उधर, कांग्रेस इस बदलाव को भाजपा की छवि सुधारने की कोशिश मान रही है।
अब बड़ा सवाल आगे की राजनीति का है। सवाल उठता है कि क्या जयपुर में आठ मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देना केवल नगर निकाय चुनाव की स्थानीय रणनीति है या इसका विस्तार बड़े विधानसभा चुनावों तक होगा? देखना होगा कि भाजपा आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देती है या नहीं? वैसे सवाल सिर्फ टिकटों तक सीमित नहीं है। फिलहाल मोदी मंत्रिमंडल में कोई भी मुस्लिम मंत्री नहीं है। मुख्तार अब्बास नकवी के बाद से मोदी सरकार में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं रहा है। चूंकि इस समय मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहटें भी चल रही हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुस्लिमों को लेकर आए इस स्पष्ट संदेश और भाजपा के जयपुर प्रयोग के बाद मोदी मंत्रिमंडल में भी किसी मुस्लिम चेहरे की वापसी होती है।
बहरहाल, राजनीति में संदेश और समीकरण अक्सर अलग-अलग रास्तों से चलकर एक ही मोड़ पर मिलते हैं। फिलहाल मोहन भागवत का संदेश और भाजपा के आठ मुस्लिम टिकट उसी मोड़ पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। अब आने वाले चुनाव तय करेंगे कि यह महज एक स्थानीय प्रयोग था या भारतीय राजनीति में भाजपा की नई रणनीति की शुरुआत थी?