By नीरज कुमार दुबे | Mar 09, 2026
ईरान की राजनीति में बड़ा और विवादास्पद मोड़ आ गया है। देश की शक्तिशाली धर्मगुरु परिषद विशेषज्ञ सभा ने आधिकारिक घोषणा करते हुए 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उनके पिता अली खामेनेई की हाल ही में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान में मौत हो गई थी। इस घटनाक्रम ने पहले ही पूरे पश्चिम एशिया को संकट में डाल दिया था और अब मोजतबा खामेनेई के सत्ता में आने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हम आपको बता दें कि ईरान में सर्वोच्च नेता का पद देश की सबसे शक्तिशाली संवैधानिक और धार्मिक सत्ता माना जाता है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से यह पद ईरान की राजनीतिक व्यवस्था का केंद्र रहा है। सर्वोच्च नेता न केवल राज्य का सर्वोच्च मार्गदर्शक होता है बल्कि सेना और सुरक्षा तंत्र पर भी उसका सीधा नियंत्रण होता है। अली खामेनेई लगभग 37 वर्षों तक इस पद पर बने रहे और अब उनके बेटे ने उनकी जगह ले ली है।
हालांकि मोजतबा खामेनेई का नाम वर्षों से ईरान की सत्ता के पीछे सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में गिना जाता रहा है, लेकिन वह सार्वजनिक जीवन में बहुत कम दिखाई देते थे। अपने 55 से अधिक वर्षों के जीवन में उन्होंने अपेक्षाकृत शांत और पर्दे के पीछे रहकर काम करने की रणनीति अपनाई। इसी दौरान उन्होंने ईरान के सुरक्षा तंत्र, धर्मगुरुओं और धनी कारोबारी वर्ग के साथ मजबूत संबंधों का एक विशाल नेटवर्क तैयार कर लिया।
साथ ही मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले से ही युद्ध और अंदरूनी असंतोष से जूझ रहा है। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई के बाद शुरू हुए संघर्ष ने देश को अस्थिर कर दिया है। दूसरी ओर जनता का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से शासन के खिलाफ नाराज है। हम आपको याद दिला दें कि हाल के समय में कई बड़े विरोध प्रदर्शन हुए जिनमें हजारों लोग सड़कों पर उतरे। जनवरी में महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों ने जल्दी ही सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया था। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इन प्रदर्शनों में कम से कम सात हजार नागरिक मारे गए।
इसके अलावा, मोजतबा खामेनेई की छवि भी विवादों से घिरी रही है। कई आलोचक उन्हें उस व्यवस्था का प्रतीक मानते हैं जिसके खिलाफ ईरान में जनता का एक वर्ग लगातार आवाज उठा रहा है। उनके पिता के शासनकाल में राजनीतिक विरोधियों और आम नागरिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। ईरान में अमीर राजनीतिक परिवारों के बच्चों के लिए प्रचलित शब्द आगाजादे का इस्तेमाल भी अक्सर मोजतबा के संदर्भ में किया जाता है।
मोजतबा खामेनेई की संपत्ति को लेकर भी लगातार चर्चा होती रही है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उनके पास अरबों डॉलर की संपत्ति है और उन्होंने दुनिया के कई देशों में महंगी संपत्तियों का विशाल जाल खड़ा किया है। हालांकि उनकी वास्तविक कुल संपत्ति का सटीक अनुमान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन जांच रिपोर्टों में कहा गया है कि उनके नियंत्रण में लक्जरी घरों और होटलों का बड़ा अंतरराष्ट्रीय पोर्टफोलियो है।
बताया जाता है कि तेहरान से लेकर दुबई और जर्मनी के फ्रैंकफर्ट तक उनकी संपत्तियां फैली हुई हैं। लंदन के बेहद महंगे इलाके बिशप्स एवेन्यू में भी उनके कई आलीशान घरों का जिक्र सामने आया है। इस इलाके को अक्सर अरबपतियों की लाइन कहा जाता है जहां एक एक घर की कीमत करोड़ों यूरो तक होती है। इसके अलावा यूरोप के कई देशों में पांच सितारा होटलों और उच्च श्रेणी की इमारतों में उनके निवेश की खबरें भी सामने आई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार मोजतबा खामेनेई आम तौर पर अपनी संपत्तियां सीधे अपने नाम पर नहीं रखते बल्कि कंपनियों और वित्तीय मध्यस्थों के जटिल नेटवर्क के माध्यम से निवेश करते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में तो उनके स्विट्जरलैंड के बैंकों में खाते और ब्रिटेन में करीब 138 मिलियन डॉलर से अधिक कीमत की संपत्ति होने की भी बात कही गई है। कई संपत्तियां ईरानी कारोबारी अली अंसारी के नाम पर खरीदी गई बताई जाती हैं। ब्रिटेन की सरकार ने अली अंसारी को ईरान की इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड को आर्थिक समर्थन देने के आरोप में प्रतिबंधित भी किया था।
हम आपको यह भी बता दें कि मोजतबा खामेनेई का जन्म सितंबर 1969 में ईरान के पवित्र शहर मशहद में हुआ था। उन्होंने अपने शुरुआती युवा वर्ष कुम शहर के धार्मिक शिक्षण केंद्रों में बिताए। ईरान इराक युद्ध के दौरान उन्होंने मोर्चे पर भी समय बिताया और उसी दौर में सुरक्षा प्रतिष्ठान तथा खुफिया तंत्र के कई प्रभावशाली अधिकारियों से उनके संबंध बने। कहा जाता है कि उन्हीं संबंधों ने बाद में उन्हें सत्ता के केंद्र तक पहुंचने में मदद की।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विशेषज्ञ सभा का यह फैसला ईरान की सत्ता व्यवस्था में एक नए प्रकार की वंशानुगत परंपरा की शुरुआत भी माना जा रहा है। इस्लामी गणराज्य की स्थापना राजशाही के विरोध में हुई थी, इसलिए किसी नेता के बेटे को सर्वोच्च पद मिलना कई धर्मगुरुओं और राजनीतिक वर्ग के भीतर विवाद का कारण बना हुआ है। बताया जाता है कि इस फैसले से पहले सत्ता के शीर्ष नेतृत्व में भी गहरे मतभेद थे और कुछ गुट अंतरिम नेतृत्व परिषद को बनाए रखना चाहते थे।
उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही मोजतबा खामेनेई के सर्वोच्च नेता बनने का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि खामेनेई का बेटा उन्हें स्वीकार नहीं है और ईरान को ऐसा नेता चाहिए जो देश में शांति और सामंजस्य ला सके। ट्रंप ने यहां तक कहा कि वह चाहते हैं कि ईरान के अगले नेता के चयन में उनकी भी भूमिका हो।
दूसरी ओर, मोजतबा खामेनेई के सत्ता में आने से यह संकेत भी मिला है कि ईरान अपनी कठोर विदेश नीति से पीछे हटने वाला नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि वह अपने पिता की नीति को आगे बढ़ाते हुए अमेरिका विरोधी रुख और इस्लामी विचारधारा को प्राथमिकता देंगे। साथ ही यह भी आशंका है कि वह अपने पिता, मां और पत्नी की मौत का बदला लेने की कोशिश कर सकते हैं जो हालिया हवाई हमलों में मारे गए थे।
बहरहाल, अब जब मोजतबा खामेनेई ईरान की सत्ता के शिखर पर पहुंच चुके हैं तो पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। एक ओर युद्ध का खतरा बना हुआ है तो दूसरी ओर ईरान के भीतर राजनीतिक असंतोष भी बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि नया सर्वोच्च नेता देश को किस दिशा में ले जाता है।