By अंकित सिंह | Aug 13, 2026
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि संसद का हाल ही में खत्म हुआ मॉनसून सत्र विधायी नज़रिए से सफल रहा, जिसमें 12 बिल पास हुए, लेकिन उन्होंने माना कि बहस और चर्चा के मामले में यह सत्र उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। सत्र खत्म होने के बाद मीडिया से बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस सत्र का आकलन दो अलग-अलग नज़रियों से किया। जहाँ विधायी कामकाज योजना के मुताबिक आगे बढ़ा, वहीं दोनों सदनों में हुए हंगामे ने कुल कामकाज पर असर डाला।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मैंने एक और बात देखी है कि कांग्रेस सांसदों को लगता है कि उनका मुख्य काम सिर्फ़ नारे लगाना और प्लेकार्ड व बैनर लेकर हंगामा करना है। उन्होंने यही सोच अपना ली है... वे सुबह उठते हैं, तकिया उठाते हैं, संसद परिसर जाते हैं और नारेबाज़ी व अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उनका काम बस इतना ही रह गया है; उन्होंने यही स्थिति बना दी है। संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर, मुझे कांग्रेस सांसदों, खासकर नए सांसदों के लिए सचमुच दुख होता है। मैं बहुत संवेदनशील व्यक्ति हूँ और कांग्रेस सांसदों का दर्द समझ सकता हूँ। अगर बहस या चर्चा ही नहीं होगी तो वे कैसे सीखेंगे? मैं वरिष्ठ सदस्यों से तो ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता, लेकिन नए सांसदों को सार्थक बहस और चर्चा का मौका नहीं मिला। गलती कांग्रेस पार्टी की है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि जब हम शीतकालीन सत्र के लिए फिर से मिलेंगे, तो सोच-समझकर किए गए चिंतन से बेहतर बदलाव आएगा।
रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में 11 बिल बिना चर्चा के पास हुए, जबकि एक पर चर्चा हुई। राज्यसभा में बिल पर पूरी चर्चा हुई। सिर्फ़ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और कुछ अन्य दलों ने वॉकआउट किया, जबकि बाकी विपक्षी पार्टियाँ चर्चा में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि हंगामा करते हुए भी मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। पहले विपक्ष बातचीत में शामिल होता था, जबकि ये लोग विपक्ष में होते हुए भी चर्चा से भागते हैं।
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