मोरारजी देसाई ऐसे एकलौते प्रधानमंत्री थे जिन्हें भारत और पाक ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा था

By अनुराग गुप्ता | Apr 10, 2020

भारत के छठे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का जन्म गुजरात के भदेली गांव में 29 फरवरी, 1896 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जबकि 10 अप्रैल 1995 को 99 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। कांग्रेस के बेहद करीबी लोगों में से एक मोरारजी देसाई को पार्टी छोड़ने के बाद 81 वर्ष की उम्र में पहली बार प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला था और 2 साल तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

 

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गैर-कांग्रेसी के तौर पर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पहुंचने वाले मोरारजी देसाई को पाकिस्तान ने अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा था। आपको बता दें कि देश में एकलौते मोरारजी देसाई ही ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं जिनको भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है। देश ने उन्हें अपना सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा तो वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने उन्हें अपने सर्वोच्‍च सम्‍मान निशान-ए-पाकिस्‍तान से नवाजा।


गांधीवादी विचारधारा के पक्के समर्थक रहे मोरारजी देसाई खादी को देश का वस्त्र मानते थे और उन्होंने हमेशा ही स्वदेशी चीजों का समर्थन किया। उनका हमेशा से मानना था कि एक दिन देश को खादी पर आना ही पड़ेगा।

 

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इससे जुड़ा हुआ एक किस्सा भी खूब सुनाई देता है कि जब मोरारजी देसाई का एक पत्रकार साक्षात्कार कर रही थी तो उस वक्त मोरारजी देसाई ने उस पत्रकार से पूछ लिया कि तुम गांधीजी को कितना याद करती हो ? गांधी तक तो पहनती नहीं हो। मुझे देखो, मैं हमेशा खादी पहनता हूं। इस पर पत्रकार ने जवाब दिया कि यह तो मंहगा है तो मोरारजी देसाई ने मजे में पत्रकार को जवाब दिया कि जो तुम पहनी हो वो कौन सा सस्ता है ? कुछ भी कहिए, एक दिन देश को तो खादी पर आना ही पड़ेगा। तो कुछ इस तरह के थे भारत के छठे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई।


कांग्रेस में रहते हुए अक्सर उनका नाम सुनाई देता था प्रधानमंत्री पद के लिए मगर जब वक्त आता था तो वह इस दौड़ में पिछड़ जाते थे। हालांकि, कांग्रेस से अलग होने के बाद साल 1977 में जब इंदिरा गांधी की सरकार गिर गई तो उन्हें ये मौका मिला और यह पहला मौका था जब देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई बने।

 

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1977 से लेकर 1979 तक मोरारजी देसाई कार्यकाल रहा। हालांकि चौधरी चरण सिंह के साथ मतभेदों के चलते उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़ने के बाद से और प्रधानमंत्री बनने से पहले तक मोरारजी देसाई कांग्रेस में बने रहे थे।


अनुराग गुप्ता

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