आयकर कानून की भाषा, संरचना, संभावित कराधान पर ज्यादा सुझाव मिलेः CBDT Chief

By Prabhasakshi News Desk | Feb 03, 2025

नयी दिल्ली । केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि पुराने प्रत्यक्ष कर कानून की समीक्षा कर रही आयकर विभाग की आंतरिक समिति को कानून की सरल बनाने, प्रावधानों को बेहतर ढंग से पेश करने और संभावित कराधान जैसी योजनाओं का दायरा बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर सुझाव मिले हैं। अग्रवाल ने कहा कि समीक्षा पैनल ने ब्रिटेन,ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य देशों में की गई इसी तरह की समीक्षा कार्रवाई से जुड़े विचार-विमर्श और प्रक्रियाओं का भी अध्ययन किया।

समीक्षा समिति को विभिन्न हितधारकों से आयकर कानून में संशोधनों से जुड़े करीब 6,500 सुझाव मिले हैं। सीतारमण ने शनिवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार आने वाले सप्ताह में संसद में नया आयकर विधेयक पेश करेगी, जो 1961 के आयकर कानून की जगह लेगा। इस बारे में अग्रवाल ने कहा कि आंतरिक समिति को अधिनियम की के सरलीकरण, विभिन्न प्रावधानों की संरचना के बारे में सुझाव मिले और संभावित कराधान लागू होने की संभावना वाले क्षेत्रों को लेकर बड़े पैमाने पर सुझाव मिले। 

संभावित कराधान योजना छोटे करदाताओं को कुछ परिस्थितियों में नियमित बही-खाता बनाए रखने के थकाऊ काम से राहत देने का काम करती है। इस योजना को चुनने वाला व्यक्ति एक निर्धारित दर पर आय घोषित कर सकता है और इसके बदले में उसे लेखा परीक्षा के लिए बही-खाता रखने से राहत मिलती है। सीबीडीटी प्रमुख ने नए आयकर विधेयक के बारे में कहा, इसे जिस तरह से तैयार किया गया है, वह करदाता के लिए वास्तव में अधिनियम के प्रावधानों की समझ को आसान बनाना है। इसके अलावा इसमें कुछ पुराने प्रावधानों को भी हटाया जा सकता है।

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