Delhi Schools Bomb Threats | दिल्ली के 20 से अधिक स्कूलों को मिली बम की धमकी, दहशत में छात्र और अभिभावक, जानें इमेल में क्या लिखा था?

By रेनू तिवारी | Jul 18, 2025

दिल्ली के स्कूल इस वक्त दहशत में हैं। स्कूलों को लगातार बम से उड़ाने की धमकिया दी जा रही हैं। शुक्रवार सुबह दिल्ली के 20 से ज़्यादा स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले। स्कूलों में बम निरोधक दस्ते और अन्य दस्ते मौजूद हैं और तलाशी अभियान जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस और विभिन्न त्वरित प्रतिक्रिया प्राधिकारियों ने तलाश और निकासी अभियान शुरू कर दिया है। इस हफ्ते यह चौथा दिन है जब राष्ट्रीय राजधानी के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं। पुलिस तथा अग्निशमन विभाग के कर्मी विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर स्कूलों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इनके साथ बम निरोधक दस्ते और श्वान दस्ते भी हैं।

दहशत में छात्र और अभिभावक

अब तक दक्षिण दिल्ली के समरफील्ड इंटरनेशनल स्कूल, पीतमपुरा में मैक्सफोर्ट जूनियर स्कूल और गुरु नानक स्कूल, द्वारका के सेंट थॉमस स्कूल, जीडी गोयनका स्कूल और द्वारका इंटरनेशनल स्कूल, पश्चिम विहार के रिचमंड स्कूल और रोहिणी के छह स्कूलों - सेक्टर 3 के एमआरजी स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेक्टर 24 के सॉवरेन पब्लिक स्कूल और हेरिटेज पब्लिक स्कूल, सेक्टर 9 के आईएनटी पब्लिक स्कूल तथा सेक्टर 3 स्थित अभिनव पब्लिक स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘आज 20 से ज्यादा स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है! सोचिए बच्चे, अभिभावक और शिक्षक किस स्थिति से गुजर रहे होंगे।’’ आतिशी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ दिल्ली में शासन के सभी चार इंजनों पर भाजपा का नियंत्रण है फिर भी वह हमारे बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं है! यह हैरान करने वाला है।’’ कई सुरक्षा एजेंसियों ने बृहस्पतिवार को किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी की जांच के लिए 10 स्थानों पर मॉक ड्रिल की थी।

बम की धमकी वाले पत्र में क्या लिखा था?

दिल्ली पुलिस ने बम की धमकी वाले पत्र का खुलासा किया है:-

नमस्ते। मैं आपको यह बताने के लिए लिख रहा हूँ कि मैंने स्कूल की कक्षाओं में कई विस्फोटक उपकरण (ट्राइनाइट्रोटोल्यूइन) रखे हैं। विस्फोटकों को बड़ी ही कुशलता से काले प्लास्टिक के थैलों में छिपाया गया है। मैं आप सभी को इस दुनिया से मिटा दूँगा। एक भी जीवित नहीं बचेगा। जब मैं समाचार देखूँगा तो खुशी से हँसूँगा, और देखूँगा कि माता-पिता स्कूल पहुँच रहे हैं और उनके बच्चों के ठंडे, क्षत-विक्षत शरीर उन्हें दिखाई दे रहे हैं।

आप सभी इस पीड़ा के हकदार हैं। मुझे अपनी ज़िंदगी से सचमुच नफरत है, मैं इस खबर के बाद आत्महत्या कर लूँगा, अपना गला काट लूँगा और अपनी कलाईयाँ काट लूँगा। मुझे कभी भी पूरी तरह से मदद नहीं मिली, मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, किसी ने कभी परवाह नहीं की और न ही कोई कभी परवाह करेगा। आपको बस असहाय और नासमझ इंसानों को दवा देने की परवाह है, मनोचिकित्सक आपको कभी नहीं बताते कि ये दवाएँ आपके अंगों को खराब करती हैं या इनसे घिनौना वज़न बढ़ता है। आप लोगों का दिमाग़ धोकर उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि मनोरोग की दवाएँ उनकी मदद कर सकती हैं। लेकिन वे नहीं करतीं। मैं इसका जीता-जागता सबूत हूँ कि वे नहीं करतीं। आप सब इसी के लायक हैं। आप भी मेरी तरह तकलीफ़ सहने के लायक हैं।

 

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