मानव कल्याण में व्यतीत किया अपना पूरा जीवन, 8 साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया फिर भी नहीं घबराईं मदर टेरेसा

By अनुराग गुप्ता | Aug 26, 2022

मैं चाहती हूं कि आप अपने पड़ोसी के बारे में चिंतित रहें। क्या आप अपने पड़ोसी को जानते हैं। ये शब्द मानवता की मिसाल पेश करने वाली मदर टेरेसा के... यूं तो भारतीय नहीं होने के बावजूद मदर टेरेसा भारत आईं और यहां के लोगों से बेपनाह मोहब्बत की और अपना जीवन व्यतीत किया। तो चलिए हम आपको आज मदर टेरेसा के जीवन से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां देते हैं।

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मदर टेरेसा को पढ़ाई के साथ-साथ गाना गाना बेहद पसंद था। ऐसा माना जाता है कि वो जब मात्र 12 साल की थी तब ही उन्हें ये अनुभव हो गया था कि वो अपना सारा जीवन मानव सेवा में लगाएंगी। 18 साल की उम्र में उन्होंने सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो में शामिल होने का फैसला ले लिया। इसके बाद वो आयरलैंड गईं और अंग्रेजी भाषा सीखी।

जब भारत आईं मदर टेरेसा

मदर टेरेसा 6 जनवरी, 1929 को कोलकाता में लोरेटो कान्वेंट पहुंचीं और 1944 में हेडमिस्ट्रेस बनीं। दूसरे विश्व युद्ध के साये में बंगाल का सामना सबसे भयंकर अकाल से था। लाखों लोग भूख से मर गए। म्यांमार पर जापान के हमले के बाद लोग भागकर कोलकाता की सड़कों पर आ गए। 1943 के अकाल में कोलकाता में बड़ी संख्या में मौतें हुईं और लोग गरीबी से बेहाल हो गए। ऐसी हालत में 1946 में मदर टेरेसा ने गरीबों, लाचारों, बीमारों और असहायों की जीवन भर मदद करने का प्रण लिया।

इसके बाद मदर टेरेसा ने पटना के होली फैमली अस्पताल से नर्सिंग ट्रेनिंग पूरी की और फिर 1948 में वापस कोलकाता आ गईं। यहां से वो तालतला गईं, जहां पर उन्होंने मरीजों का अच्छा खासा ध्यान रखा और पट्टियां की। 7 अक्टूबर, 1950 को उन्हें वेटिकन से मिशनरी ऑफ़ टैरेटी की स्थापना की अनुमति मिल गई। इस संस्था का उद्देश्य उन लोगों की सहायता करना था जिनकी समाज में कई जगह नहीं थी। 

जब भारतीय नागरिक बनी मदर टेरेसा

मदर टेरेसा ने 14 दिसंबर, 1951 को अल्बेनिया की नागरिकता छोड़कर भारत की नागरिक ग्रहण की। मदर टेरेसा को  मानवता की सेवा के लिए अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए। भारत सरकार ने मदर टेरेसा 1962 में पद्मश्री और फिर 1980 में भारत रत्न से नवाजा। मदर टेरेसा को 1979 को नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला। दुनिया के सवोच्च सम्मानों के शिखर पर खड़ीं मदर टेरेसा की सेहत 1997 को खराब होने लगी। लगातार खराब सेहत के कारण 13 मार्च, 1997 को उन्होंने मिशनरी ऑफ़ चेरेटी के मुखिया का पद अपनी सहयोगी सिस्टर निर्मला को दे दिया। 5 सितंबर, 1997 को उनकी मौत हो गई। 

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मान सेवा और गरीबों की देखभाल करने वाली मदर टेरेसा को पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 19 अक्टूबर, 2003 को रोम में धन्य घोषित किया। 15 मार्च, 2016 को पोप फ्रांसेस ने कार्डेना परिषद में संत की उपाधि देने की घोषणा की।

मदर टेरेसा के अनमोल विचार

सादगी से जीवन जिएं ताकि दूसरे भी जी सकें।

अनुशासन लक्ष्यों और उपलब्धियों के बीच का फूल है।

खूबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते, लेकिन अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं।

प्रेम की भूख को मिटाना, रोटी की भूख मिटाने से कई गुना मुश्किल है।

प्रेम हर मौसम में होने वाला फल है और हर व्यक्ति की पहुंच के भीतर है।

दया और प्रेम भले ही छोटे शब्द हो सकते हैं, लेकिन इनकी गूंज बहुत ही उन्नत होती है।

- अनुराग गुप्ता

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