मध्य प्रदेश में टीईटी अनिवार्यता से 1.50 लाख शिक्षक प्रभावित, कांग्रेस ने मांगा विधानसभा का विशेष सत्र

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 01, 2026

भोपाल, एक सितंबर मध्यप्रदेश में विपक्षी कांग्रेस ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने से करीब 1.50 लाख कार्यरत शिक्षकों के प्रभावित होने का दावा करते हुए इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव को मंगलवार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर उनका ध्यान आकर्षित किया है। सिंघार ने पत्र में कहा कि प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के कारण उनकी सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों को लेकर गंभीर एवं विषम स्थिति उत्पन्न हो गई है।

सिंघार ने इन फैसलों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘ऐसे में प्रदेश सरकार को शिक्षकों के भविष्य और उनके परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।’’ नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 25 अगस्त 2026 को पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। इसमें 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने तथा उनके सेवा एवं पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण का प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्य अपने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा के माध्यम से पहल कर सकते हैं, तो मध्यप्रदेश सरकार को भी शिक्षकों की समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकालने के लिए आगे आना चाहिए।

सिंघार ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि शिक्षकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बुलाया जाए, ताकि टीईटी से संबंधित समस्या पर व्यापक चर्चा हो सके और प्रदेश के करीब 1.50 लाख प्रभावित शिक्षकों तथा उनके परिवारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लिया जा सके।

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