MP High Court ने दमोह स्कूल Hijab Case में चार आरोपियों की FIR रद्द करने की याचिका खारिज की

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 12, 2026

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने दमोह के एक स्कूल में छात्राओं को कथित तौर पर हिजाब पहनने और विशेष धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए मजबूर करने के मामले में चार पूर्व पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने शुक्रवार को कहा कि छात्राओं को धमकी देकर कथित तौर पर मजबूर किए जाने संबंधी विशिष्ट आरोपों को निराधार नहीं कहा जा सकता और इनकी सत्यता साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। अदालत ने स्कूल के पूर्व पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार जैन, अब्दुल वसीम बारी, शिक्षक अनस अथर और कार्यालय सहायक रुस्तम अली की प्राथमिकी रद्द करने के अनुरोध वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।

समिति की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्वक किया गया कृत्य), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 506 (आपराधिक धमकी) तथा किशोर न्याय अधिनियम और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि स्कूल में हिजाब पहनने, नमाज पढ़ने और उर्दू के अध्ययन को अनिवार्य कर दिया गया जबकि तिलक और कलावा पहनने पर रोक थी। अदालत ने कहा कि प्राथमिकी में छात्राओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध एक विशेष पहनावे और धार्मिक प्रथाओं का पालन करने के लिए धमकी और दबाव डालने के विशिष्ट आरोप हैं।

पीठ ने कहा कि ऐसे में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया निराधार नहीं कहा जा सकता। आरोपों की सत्यता साक्ष्यों के आधार पर तय होगी। पुलिस इस मामले में पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

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