बिना लड़े ही हार मान गए MS धोनी और केदार जाधव

By अनुराग गुप्ता | Jul 01, 2019

भारत बनाम इंग्लैंड के बीच बर्मिंघम में खेले गए मुकाबले में अभी तक कई दिग्गज खिलाड़ियों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि इस मुकाबले को इंग्लैंड ने 31 रन से जीत लिया है। जबकि लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने शतकीय पारी खेली तो विराट कोहली ने लगातार इस विश्व कप में पांचवां अर्धशतक जड़ दिया। हालांकि वह इसे शतक में तब्दील नहीं कर पाए और प्लंकेट के हाथों आसानी से आउट हो गए। 

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हार का असल विलेन कौन?

विश्व कप अभियान में टीम इंडिया को मिली पहली हार से भारतीय क्रिकेटप्रेमी समेत पाकिस्तान और बांग्लादेश भी बेहद दुखी नजर आ रहे हैं। क्योंकि पाकिस्तान को अगर टॉप चार पर कोई पहुंचा सकता था तो वह सिर्फ और सिर्फ भारत था लेकिन वह तो मुकाबला हार गया और पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिर गया। लक्ष्य पीछा कर रहे खिलाड़ियों में से सबसे ज्यादा किसी को आलोचना सहनी पड़ी तो वो भी टीम के सबसे ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी को।

इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने मैच की कमेंट्री के वक्त कहा कि धोनी आखिर कर क्या रहे हैं? कम से कम उनको कोशिश तो करनी चाहिए। हालांकि हुसैन की बातों से सौरव गांगुली भी सहमत देखे गए। इतना ही नहीं एक बार फिर वीवीएस लक्ष्मण धोनी की पारी देख निराश हो गए तो आकाश चोपड़ा ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानो भारत ने पहले ही अपने घुटने टेंक दिए हो।

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भारत ने शुरुआत में ही गंवा दिया था मैच 

केएल राहुल के चोटिल हो जाने के बाद रवींद्र जडेजा उनकी जगह पर क्षेत्ररक्षण करने के लिए आए और उन्होंने कुलदीप की गेंद पर जेसन रॉय का कैच पकड़कर साबित कर दिया कि उनसे अच्छा फील्डर टीम इंडिया में कोई नहीं है। लेकिन पारी में संकट उस समय छाया जब महेंद्र सिंह धोनी और जाधव इंग्लैंड के गेंदबाजों को खेल नहीं पा रहे थे। 

हाल ही में वीवीएस लक्ष्मण ने कहा था कि शुरुआत में धोनी का स्ट्राइक रेट 45 से 50 का होता है, जिसकी वजह से साथी खिलाड़ी पर प्रेशर पड़ता है। ठीक ऐसा ही बीते दिनों देखने को मिला और मैदान पर अच्छा कर रहे हार्दिक पांड्या एक खराब शार्ट खेलकर वापस पवेलियन की तरफ लौट गए। जिसके बाद से कभी भी ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि टीम ने मैच को जीतने का प्रयास भी किया हो। क्रिकेट एक्सपर्ट्स ने कहा कि कम से कम भारत को प्रयास तो करना चाहिए था हारना जीतना तो खेल में लगा रहता है लेकिन आपने अगर प्रयास किया होता और फिर हार का सामना करना पड़ता तो कोई बात नहीं थी।

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धोनी के साथ-साथ जाधव ने भी नहीं की कोशिश

धोनी और जाधव ने कुल 31 गेंदों का सामना किया। इस दौरान उन्होंने 7 डॉट गेंद खेली और 20 सिंगल हासिल किए। जबकि 3 चौके और आखिरी ओवर की पहली गेंद पर एक छक्का जड़ा। जबकि होना यह चाहिए था कि आखिरी के पांच ओवरों में भारत को अपना ग्रेयर चेंज कर तेजी से रन बनाने की आवश्यकता थी।

हालांकि मैच के बाद कप्तान विराट कोहली ने धोनी और जाधव का बचाव करते हुए कहा कि वो गेंद को सीमा पार पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कोहली ने कहा कि गेंद कुछ रुक कर आ रही थी, इसलिए आखिर में बल्लेबाजी करना मुश्किल हो गया था। हम अपना आकलन करेंगे और अगले मैच में सुधार करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें यह स्वीकार करना होगा कि विपक्षी टीम कहीं बेहतर खेली।

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आखिर धोनी ही क्यों बने विलेन? 

अब तक टीम इंडिया का सफर तो विजयक्रम के साथ आगे चल ही रहा था कि इंग्लैंड ने इसमें विराम लगा दिया हालांकि अनुभवी धोनी का खेल भी भारतीय टीम के लिए आने वाले दिनों में चिंता का विषय बन सकता है। क्योंकि अफगानिस्तान के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी ने 52 गेंदों पर महज 28 रन बनाए वो भी 3 चौकों की मदद से। इस वक्त धोनी का स्ट्राइक रेट 53.85 का था और विंडीज के खिलाफ तो उनका प्रदर्शन और कमतर हो गया। इस दौरान 56 रन की पारी खेलते हुए धोनी ने 26 रन 45 गेंदों पर बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 57.78 का रहा। जबकि धोनी ने अगले 30 रन 187.50 के स्ट्राइक रेट के साथ महज 16 गेंदों में ही जड़ दिए। 

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