By अनुराग गुप्ता | Apr 05, 2022
एम.एस.स्वामीनाथन की गिनती भारत के महान कृषि वैज्ञानिक के रूप में की जाती है और इन्हीं के प्रयासों की वजह से 60 के दशक में भारत में हरित क्रांति सफल हो पाई थी। इसी लिए एम.एस. स्वामीनाथन को हरित क्रांति का जनक माना जाता है। भारत की आजादी के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए और लोगों को सशक्त करने का सबसे बड़ा और कारगर तरीका था कि किसानों की उपज अच्छी और ज्यादा से ज्यादा हो। ताकि देश का किसान संपन्न हो सके और अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी निभा सके। यह तो सभी जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है।
देश की आजादी के लगभग 18 साल बाद 60 के दशक में अनाज का उत्पादन काफी कम हो रहा था और अकाल जैसी स्थिति पैदा होने लगी थी। ऐसे में भारत जैसे विशाल देश को अकाल से तो बचाना ही थी साथ ही साथ अर्थव्यवस्था को रफ्तार भी देनी थी, ऐसे में एम.एस. स्वामीनाथन ने विषम परिस्थितियों के बावजूद भारत को इस समस्या से निजात दिलाया था।
कौन हैं एम.एस. स्वामीनाथन ?
एम.एस. स्वामीनाथन जिनका पूरा नाम मनकोम्बु संबासिवन स्वामिनाथन है, का जन्म 7 अगस्त, 1925 को तमिलनाडु के कुम्भकोणम में हुआ था। उन्होंने गेहूं की सबसे बेहतरीन उपज देने वाली किस्मों को विकसित किया, जिसकी मदद से सतत विकास को बढ़ावा दिया गया। दरअसल, अंग्रेजों से मुक्ति मिलने के बावजूद किसी ने भी किसानों को शिक्षित नहीं किया था, ऐसे में अकाल जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगी, वो भी कृषि प्रधान देश में। इसके पीछे का मुख्य कारण सदियों से चले आ रहे उपकरण और फसलों की उन्नति के लिए बीजों में सुधार का न होना था।
एम. एस. स्वामीनाथन ही वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने सबसे पहले गेहूं की एक बेहतरीन किस्म को पहचाना और उससे किसानों को अवगत कराया। उन्हें किसानों का मसीहा भी कहा जाता है।
स्वामीनाथन के बारे में रोचक तथ्य: