By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 11, 2026
महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग (एमएसएचआरसी) ने कथित रूप से बच्चों को वाहन के बोनट से बांधकर उन्हें घुमाने, अवैध रूप से हिरासत में लेने, उन्हें यातना देने के मामले में पुणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है। आयोग ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को उसकी तथ्यान्वेषण रिपोर्ट को प्राथमिकी के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया है। आयोग की पूर्ण पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. एम. बादर और सदस्य संजय कुमार तथा स्वप्ना जोशी शामिल थे।
जांच में यह भी सामने आया कि नाबालिगों को कथित तौर पर हिरासत में हिंसा का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि उन्हें 20 जुलाई एवं 24 जुलाई के बीच निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक समय तक अवैध रूप से पुलिस लॉकअप में रखा गया, जिसके बाद उन्हें किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया।