By अनन्या मिश्रा | Mar 07, 2026
आज ही के दिन यानी की 07 मार्च को योगगुरु परमहंस योगानंद का निधन हो गया था। परमहंस योगानंद ने ही भारत के क्रिया योग को विश्व पटल पर स्थापित करने का काम किया था। परमहंस 20वीं सदी के एक आध्यात्मिक गुरु, संत और योगी थे। उन्होंने अपने अनुयायियों को क्रिया योग का उपदेश दिया और पूरे विश्व में इसका प्रचार-प्रसार किया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर परमहंस योगानंद के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 05 जनवरी 1893 को मुकुंद लाल घोष का जन्म हुआ था। वह एक समृद्ध और धर्मपरायण बंगाली परिवार से ताल्लुक रखते थे। इनके पिता का नाम भगवती चरण घोष था, जोकि बंगाल रेलवे में वाइस प्रेसिडेंट थे।
सन् 1925 में योगानंद ने लॉस एंजेलिस में निवास किया। यहां पर उन्होंने अपने संगठन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय स्थापित किया। व्यवसाय, विज्ञान और कला क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां योगानंद के शिष्य बन गए। वहीं सन् 1917 में एक आदर्श-जीवन विद्यालय की स्थापना के साथ परमहंस योगानंद ने अपने कार्यकी शुरूआत की थी। इसमें उन्होंने आधुनिक शैक्षणिक तरीकों के साथ योग प्रशिक्षण और आध्यात्मिक आदर्श में निर्देशों को जोड़ा था।
बता दें कि परमहंस योगानंद को पश्चिमी देशों में 'फादर ऑफ योगा' कहा जाता है। योगानंद के प्रयासों और कार्यों का परिणाम है कि आज 'क्रिया योग' पूरी दुनिया में फैल चुका है और इसका लगातार विस्तार हो रहा है। भारत सरकार ने सबसे पहले साल 1977 और दूसरी बार 07 मार्च 2017 में योगानंदजी और उनकी संस्था के सम्मान में डाक टिकट जारी किए थे।
वहीं 07 मार्च 1952 में परमहंस योगानंद ने महासमाधि ले ली थी। लेकिन महासमाधि लेने के बाद अनेक दिनों तक उनके पार्थिव शरीर में कोई विकृति देखने को नहीं मिली थी। जिससे 'फारेस्ट लान मैमोरियल' के अधिकारी हैरान रह गए थे।