जिसे बताया लापता, उसे ईरान ने ठोका, होर्मुज में करोड़ों का US ड्रोन स्वाहा

By अभिनय आकाश | Apr 16, 2026

9 अप्रैल 2026 को परर्शियन गल्फ के ऊपर उड़ रहा अमेरिकी एमक्यू4 सी ट्राइटन ड्रोन अचानक रडार से गायब हो गया था। कुछ ही समय बाद अमेरिकी नौसेना ने इसे क्रैश घोषित कर दिया। आधिकारिक बयान साफ था कि यह तकनीकी हादसा है। कोई हमला नहीं। लेकिन मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात और पुराने घटनाक्रमों को देखते हुए यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या अमेरिका हर बार सच को क्रैश के पीछे छिपा देता है। यह पहली बार नहीं है जब किसी अमेरिकी सैन्य उपकरण के नुकसान को लेकर दो अलग-अलग नैरेटिव सामने आए हो। इतिहास में कई बार ऐसे दावे किए गए हैं कि ईरान ने अमेरिकी ड्रोन या सैन्य विमानों को निशाना बनाया। जबकि अमेरिका ने उन्हें तकनीकी खराबी दुर्घटना बताया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अक्सर नहीं हो पाती है लेकिन संदेह की यह परत हर नई घटना के साथ और मोटी होती जाती है। 

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जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती यह घटना सिर्फ एक क्रैश नहीं बल्कि एक बड़ा सवाल बना रहेगी। क्या यह तकनीकी हादसा था या फिर एक और ऐसी घटना जिसे दुनिया के सामने अधूरी कहानी के रूप में पेश किया गया। जैसी की आशंका थी कि ईरान अमेरिका दो हफ्तों की जंगबंदी के बीच इसराइल कोई ना कोई खलल जरूर डालेगा और यह आशंका सही भी साबित हो गई। इसराइल ने इस जंगबंदी के दूसरे ही दिन अपना काम शुरू कर दिया और लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले अंजाम दिए। लेबनान ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह का गढ़ है और ईरान पहले ही कह चुका है कि हिजबुल्ला पर हमला नहीं होना चाहिए। नहीं तो जंगबंदी टूट जाएगी। एक्सपर्ट कहते हैं कि इसराइल वही चाह रहा है कि किसी भी सूरत में ईरान अमेरिका बात ही ना कर पाए। यह जंग चलती रहे। अमेरिका इस जंग से पीछा छुड़ाकर निकल ना जाए। महज 24 घंटे के भीतर ही शांति और राहत की उम्मीद इसराइल ने तोड़ दी। इसराइल ने भले ही अमेरिका के सीज फायर का समर्थन किया, लेकिन उसने एक के बाद एक लेबनान पर कई हमले किए। ऐसे में अमेरिका की तरफ से भी यह साफ कर दिया गया है कि लेबनान इस सीज फायर का हिस्सा नहीं है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका ईरान संघर्ष विराम का हिस्सा लेबनान नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ना तो वाशिंगटन और ना ही इसराइल ने इस पर सहमति दी थी। 

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पाकिस्तान के यह कहने के बाद कि लेबनान को इसमें शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इसराइल ने लेबनान भर में महज 10 मिनट के भीतर 100 हमले किए जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं। जी हां, इसराइल ने साउथ लेबनान पर 10 मिनट में ही 100 हमले अंजाम दिए और सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह ईरान के लिए उकसाने वाली कारवाई हो सकती है और ईरान ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया भी दी। उसने समंदर में फिर से पहरा लगा दिया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हरमोस को बंद कर दिया है। जिससे कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आ गया। यानी सीज फायर पर संकट आ गया है। 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शर्तों पर बात करने के लिए बैठक होनी है और उससे पहले ही इसराइल ने घमासान शुरू करवा दिया। एक्सपर्ट कहते हैं कि दरअसल इसराइल को इस बात की टीस भी थी कि उसे भरोसे में लिए बगैर ट्रंप ने ईरान के साथ सीज फायर का ऐलान कर दिया। जबकि उससे पहले ईरान पर भयानक हमले की डेडलाइन दी थी। इजराइल जानता है कि बड़ी मुश्किल से जंग में लाए गए अमेरिका को बिना किसी निर्णायक स्थिति के जाने देना मतलब अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। क्योंकि ईरान में आयतुल्लाह खामई की हत्या के बावजूद ना तो इसराइल अमेरिका वहां इस्लामिक रेवोल्यूशन को खत्म कर पाए और ना ही खामिनी सुप्रीमेसी को सब कुछ वैसा का वैसा ही है। बल्कि और आक्रामक हो गया है इसराइल के खिलाफ। ऐसे में अमेरिका का ऐसे ही पीछा छुड़ाकर चले जाना इसराइल के लिए बहुत घातक होगा और ईरान और उसके प्रॉक्सी इसराइल को छोड़ेंगे नहीं। इसलिए भी वह पूरी ताकत लगा रहा है कि जंग चलती रहे और पीएम नितिन याू को भी अपने देश की जनता को जवाब देने की वजह मिल जाए। वरना सवाल उनसे भी होगा कि ईरान पर हमला करके और इसराइल में इतना नुकसान करवाकर इसराइल को हासिल क्या हुआ?

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