By Ankit Jaiswal | Apr 17, 2026
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम फैसला सामने आया है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं के अधिकार को लेकर बड़ा निर्देश दिया है। बता दें कि अदालत ने साफ किया है कि जिन मतदाताओं के नाम विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान हटाए गए थे और बाद में अपीलीय प्राधिकरण ने उन्हें सही ठहराया है, वे चुनाव में मतदान कर सकेंगे, बशर्ते उनके मामलों का निपटारा तय समयसीमा के भीतर हो चुका हो।
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि समझें तो राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक करीब 90 लाख से अधिक नाम सूची से बाहर किए गए, जिनमें से बड़ी संख्या मौत या स्थानांतरण जैसे कारणों से हटाई गई, जबकि लाखों नाम तकनीकी या तार्किक विसंगतियों के आधार पर हटे थे।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि अपीलीय प्राधिकरण किसी मामले में शामिल या बाहर करने का स्पष्ट निर्देश देता है, तो चुनाव से पहले उसे लागू किया जाना जरूरी है। बता दें कि इस आदेश के तहत चुनाव आयोग को पूरक सूची जारी करने का अधिकार दिया गया है, ताकि योग्य मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम फिर से जोड़े जाएंगे, उन्हें समय पर पर्चियां पहुंचाई जाएंगी ताकि वे मतदान कर सकें।
वहीं चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि जो भी नाम अपील के जरिए मंजूर होंगे, उन्हें तय समयसीमा के भीतर सूची में शामिल किया जाएगा। हालांकि अब तक कुल कितनी अपीलें आई हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह संख्या लाखों में पहुंच चुकी है।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यदि लंबित अपीलों के आधार पर मतदान की अनुमति दी जाती है, तो इससे पूरी प्रक्रिया में असंतुलन पैदा हो सकता है और अन्य पक्ष भी आपत्तियां उठाने लगेंगे। ऐसे में यह जरूरी है कि केवल सत्यापित और अंतिम रूप से तय मामलों को ही शामिल किया जाए।