By अभिनय आकाश | Sep 21, 2026
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रिश्वत के एक दस साल पुराने मामले में शिक्षा विभाग के एक अधिकारी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ रिश्वत के पैसे (दागदार नोट) मिलने से ही किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि यह साफ़ तौर पर साबित न हो कि रिश्वत की मांग की गई थी। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने 2017 के ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सूरजपुर ज़िले में ज़िला शिक्षा अधिकारी के दफ़्तर में तैनात अकाउंटेंट 41 वर्षीय मुरली प्रसाद चौधरी को सज़ा सुनाई गई थी। हाई कोर्ट ने यह आदेश 18 सितंबर को बिलासपुर में दिया।
इसके बाद राजवाड़े 21 जून 2014 को बिलासपुर के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) गए और लिखित शिकायत दर्ज कराई। जांच-पड़ताल के दौरान, उनसे चौधरी के साथ हुई बातचीत को रिकॉर्ड करने के लिए कहा गया। अभियोजन पक्ष ने इन्हीं बातचीत को आधार बनाया, जिसमें कथित रिश्वत की रकम को घटाकर 8,000 रुपये करने की बात कही गई थी।