By अभिनय आकाश | Nov 06, 2025
अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में सोमवार तड़के आए 6.3 तीव्रता के भूकंप ने देश की पहचान मानी जाने वाली नीली मस्जिद को गहराई से झकझोर दिया। 15वीं सदी में बनी यह मस्जिद पैगंबर मोहम्मद के दामाद और पहले शिया इमाम हजरत अली की मजार मानी जाती है। झटकों से मस्जिद की मीनारों के ऊपरी हिस्से गिर गए, दीवारों में बड़ी दरारें आ गई। सैकड़ों फिरोजा और लापीस टाइलें टूटकर बिखर गई। अफगान अधिकारियों के अनुसार, इस भूकंप में 26 लोगों की मौत हुई और 1,100 से अधिक घायल हुए। बल्ख और समांगन प्रांतों में सैकड़ों इमारतें नष्ट हो गई। भूकंप से पहले ही अफगानिस्तान आर्थिक संकट, घटती विदेशी सहायता, और पाकिस्तान से सीमा तनाव झेल रहा था। अब यह आपदा देश की जर्जर स्थिति की प्रतीक बन गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मस्जिद उनके लिए 'मां' की तरह है, लेकिन अब यह भी टूटती जा रही है। बारिश और उपेक्षा से स्थिति और बिगड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि तालिबान सरकार ने अब तक न तो बहाली शुरू की है और न किसी अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग की है। तालिबान शासन में महिलाओं का प्रवेश मस्जिद में प्रतिबंधित है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या घट गई है। वहीं, रोजगार की कमी और गरीबी ने लोगों की पीड़ा बढ़ा दी है।
बल्ख प्रांत के सूचना एवं संस्कृति प्रमुख महमूदुल्लाह जरार ने बताया कि नीली मस्जिद की मीनार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जबकि मस्जिद की कुछ दीवारों से ईंटें और टाइलें गिर गई हैं तथा सदियों पुराने स्थल के अन्य हिस्सों में दरारें आ गई हैं। उन्होंने कहा कि यह पवित्र दरगाह इस्लामी मूल्यों और इस्लामी युग के इतिहास का एक मूल्यवान स्मारक है... (और) इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार की सख्त जरूरत है।” समांगन प्रांत के सूचना एवं संस्कृति प्रमुख फिरोजुद्दीन मुनीब ने बताया कि प्रांत में सबसे ज़्यादा क्षतिग्रस्त ऐतिहासिक स्मारक 19वीं सदी का बाग़-ए-जहांनामा महल था। 1890-1892 में बना यह महल और इसके आस-पास के बगीचे पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय स्थल हैं।