ममता को जिताने के लिए घरों से निकले मुस्लिम, लेकिन पलट गया खेल!

By अभिनय आकाश | Apr 24, 2026

श्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में बंपर वोटिंग हुई लेकिन हिंसा भी खूब हुई। दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से बीजेपी कैंडिडेट सुभेंदु सरकार को दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया। तो वहीं आसनसोल साउथ सीट से भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर भी हमला हो गया। वोटिंग के दौरान ऐसी घटना देश के किसी और राज्य में हुई होती तो लोकतंत्र अभी तक खतरे में पड़ चुका होता। पश्चिम बंगाल की हिंसा पर सब खामोश हैं। इसी बीच ममता बनर्जी को जिताने के लिए मुस्लिम भारी संख्या में घरों से निकल आए। आपको ममता बनर्जी का कुछ दिन पहले दिया गया वह बयान याद होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर तृणमूल रही तो फिर मिलेंगे। और रहा तृणमूल तो फिर मिलेंगे। 

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बीजेपी और ममता बनर्जी के बीच यही मुस्लिम वोट बैंक एक दीवार बनकर खड़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की संख्या लगभग 27% है। लेकिन पश्चिम बंगाल में 27% मुस्लिम वोट ही तय करता है कि सरकार किसकी बनेगी। 70% हिंदू यह नहीं तय कर पाता। आप देखिए कि 2021 में कुल 44 मुस्लिम विधायक बने थे जिनमें से 43 टीएमसी के थे। यानी बंगाल का मुस्लिम अब कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों में नहीं बट रहा वो पूरी तरह से ममता बनर्जी को जिताने के लिए जुट गया है। इस बार भी मुस्लिम वोटर्स ममता बनर्जी को जिताने के लिए अपने घरों से निकल आए हैं। लेकिन 2026 का चुनाव थोड़ा अलग भी है। सबसे पहले तो यह एसआईआर के बाद पहला चुनाव है। एसआईआर की वजह से 91 लाख वोट कट गए थे। जिनमें डुप्लीकेट डिस्प्यूटेड और डेड वोटर्स शामिल थे। लेकिन एसआईआर से नाम ना कट जाए इसीलिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में बसे बंगाल के वोटर्स बड़ी संख्या में वोट डालने बंगाल पहुंचे।

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