By अभिनय आकाश | May 19, 2026
कैलिफोर्निया सैंडियागो एक शाम सुबह मस्जिद के बाहर नमाज और इबादत चल रही थी। लेकिन कुछ ही सेकंड में इस इबादत को तोड़ते हुए गोलियों की तड़तहट गूंज उठी। लोग भागने लगे। चीखें गूंजने लगी और भगदड़ मचनी शुरू हो गई। कुछ पल पहले तक जहां पर इबादत का माहौल था, वहीं अब खून और डर का साम्राज्य बढ़ गया। इस हमले में तीन मासूमों की जान चली गई और हमलावर भी थोड़ी दूरी पर मृत पाया गया। अमेरिका को हिला देने वाली यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर धार्मिक स्थलों पर बढ़ती हिंसा को कौन रोकेगा। इस्लामिक सेंटर ऑफ शियागो यह वही मस्जिद थी जिसे निशाना बनाया गया था। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक दो किशोर एक 17 और दूसरा 18 साल का अचानक मस्जिद के बाहर पहुंचे और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई।
आत्महत्या जैसी बातें कर रहा है और घर से कई बंदूके गायब हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। लेकिन इससे पहले मस्जिद पर हमला हो गया। घटना के बाद पुलिस हमलावरों तक पहुंची और दोनों को कार के अंदर मृत पाया गया। शुरुआती जांच में यह माना जा रहा है कि दोनों ने खुद को गोली मार ली। पुलिस को उनकी कार और हथियारों पर इस्लाम विरोधी संदेश और नफरत फैलाने वाले मैसेज भी मिले हैं। एफबीआई ओसाने पुलिस इसे हेट क्राइम यानी धार्मिक नफरत से जोड़ रही है। ये जांच पूरी चल रही है और ऐसे समय में यह हमला हुआ है जब मुस्लिम समुदाय ईद की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। 50 से 100 पुलिस अधिकारी मस्जिद और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं। बता दें कि इस घटना ने अमेरिकी मुस्लिम समुदाय में डर और गुस्सा दोनों बढ़ा दिए। कई संगठन इसे इस्लामिक फोबिया से जोड़कर हमला बता रहे हैं। बल्कि बता दें कि अमेरिकी नेताओं से लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने इसकी निंदा करी है और देश भर में मस्जिदों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब सवाल यह उठता है कि नफरत की ये आग आखिर कब जाकर सुनेगी?