By Neha Mehta | Mar 30, 2026
साउथ इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना चुके नागा चैतन्य ने साल 2022 में आमिर खान के साथ फिल्म लाल सिंह चड्ढा के जरिए हिंदी सिनेमा में कदम रखा था। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन चैतन्य के लिए यह अनुभव किसी मायने में नकारात्मक नहीं रहा। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के बाद उन्होंने अब तक कोई नई हिंदी फिल्म साइन नहीं की है—और इसकी वजह वो किसी असफलता को नहीं मानते।
जब उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म लाल सिंह चड्ढा के ठंडे रिस्पॉन्स ने उन्हें हिंदी फिल्मों के चुनाव को लेकर ज्यादा सतर्क बना दिया है, तो उन्होंने इसे साफ तौर पर नकार दिया। उनका कहना है कि उस फिल्म की शूटिंग का अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। उन्होंने वहां बहुत कुछ सीखा और पूरी टीम से उन्हें भरपूर सहयोग मिला। उनके शब्दों में, “हर फिल्म का सफर अलग होता है—कभी सफलता मिलती है, कभी नहीं। लेकिन इससे मेरे सोचने का तरीका नहीं बदला। मैं आज भी उतना ही उत्साहित हूं जितना पहले था।”
अपनी मौजूदा व्यस्तता के बारे में बात करते हुए चैतन्य बताते हैं कि उनकी आने वाली फिल्म Thandel और प्रोजेक्ट Vrushakarma काफी जटिल हैं। खासतौर पर Vrushakarma में VFX का बड़ा रोल है, जिससे पूरी प्रक्रिया लंबी और मेहनत भरी हो जाती है। वह कहते हैं कि इस तरह की फिल्मों में प्री-प्रोडक्शन से लेकर शूटिंग तक हर चीज में काफी बारीकी और समय लगता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि वह किसी खास प्लानिंग के तहत हिंदी फिल्मों से दूर हैं—असल में वह सिर्फ अपने मौजूदा काम को पूरा समर्पण देना चाहते हैं।
जहां एक तरफ इंडस्ट्री में अब भाषाओं की सीमाएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं और साउथ व हिंदी सिनेमा के बीच क्रॉसओवर बढ़ रहा है, वहीं चैतन्य इस ट्रेंड को लेकर भी काफी सहज नजर आते हैं। उनके लिए “सही समय” से ज्यादा अहम है “सही स्क्रिप्ट”। उनका मानना है कि आज का दर्शक हर भाषा की फिल्मों को खुले दिल से स्वीकार कर रहा है, इसलिए एक अभिनेता के लिए भाषा अब कोई रुकावट नहीं रही। चैतन्य साफ तौर पर कहते हैं कि वह हिंदी फिल्मों में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन शर्त सिर्फ इतनी है कि कहानी और किरदार उन्हें भीतर से उत्साहित करें। वह ऐसे फिल्ममेकर्स के साथ काम करना चाहते हैं जिनके साथ उनका जुड़ाव बने और जहां काम का सफर उतना ही यादगार हो जितना नतीजा। उनके लिए असली मायने उसी सफर के हैं, जो उन्हें एक बेहतर कलाकार बनाता है—चाहे वह किसी भी भाषा की फिल्म क्यों न हो।