नौ महीने नहीं बल्कि 36 साल तक Pregnant रहा ये व्यक्ति, Medical Condition को समझता रहा Tumor, डॉक्टर बोले- लाखों में एक होता है मामला

By रितिका कमठान | Jun 24, 2023

नागपुर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति दो जुड़वां बच्चों के साथ प्रेग्नेंट हुआ है। मेडिकल साइंस के इतिहास में ये मामला बेहद हैरान करने वाला है। इस मामले को देखकर खुद डॉक्टर भी काफी अचंभित हुए है।

जानकारी के अनुसार जब भगत की उम्र छोटी थी तभी से उनका पेट असामान्य रूप से उभरा हुआ दिखता था। मगर घर परिवार ने इस दिशा में कोई खास ध्यान नहीं दिया। 20 साल की उम्र में उनका पेट तेजी से बढ़ने लगा, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता हुई। हालांकि इस स्थिति के बाद भी भगत ने जीवन यापन करने के लिए खेत पर काम करना जारी रखा। मगर वर्ष 1999 में उनकी स्थिति काफी खराब हो गई। उनके बढ़ते पेट का असर उनकी सांस लेने की क्षमता पर होने लगा और उन्हें सांस लेने में कठिनाई होने लगी।

उनकी लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें मुंबई के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने पहले इसे ट्यूमर माना और पेट की सर्जरी की। हालाँकि इस ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को जो मिला वो बेहद हैरान करने वाला था क्योंकि डॉक्टरों को भगत के पेट के अंदर एक इंसान मिला था। भगत के पेट में कई हड्डियां मिली थी। पहले एक अंग निकला, फिर दूसरा अंग निकला। फिर, जननांग के हिस्से, बाल, अंग, जबड़े और बाल। ऐसी स्थिति को देखकर डॉक्टर भयभीत, हतप्रभ और चकित थे। डॉक्टर ने कहा कि ऐसी स्थिति को देखना मेरे लिए काफी हैरानी वाला था।

जानें क्या होती है ये स्थिति
जानकारी के मुताबिक ये स्थिति भ्रूण में भ्रूण मानी जाती है। भ्रूण में भ्रूण एक अत्यंत दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति है जिसमें जुड़वाँ बच्चे के शरीर के भीतर एक विकृत, आंशिक रूप से विकसित भ्रूण की उपस्थिति होती है। मेडिकल साइंस के मुताबिक ये वो स्थिति होती है जब प्रारंभिक विकास के दौरान एक भ्रूण दूसरे भ्रूण को निगल जाता है। एक भ्रूण दूसरे भ्रूण को भी अपने में समाहित कर लेता है। डॉक्टरों का मानना है कि इस स्थिति का आमतौर पर शुरुआत में पता नहीं चलता है मगर पेट में दर्द या पेट में दर्द जैसे कई लक्षण बाद में उभरते है। आमतौर पर इस स्थिति से छुटकारा पाने के लिए पेशेंट को सर्जिकल हस्तक्षेप की जरुरत होती है। इसकी जटिल प्रकृति के कारण मामले में कई जटिलताएं होती हैं जिनमें उच्च जोखिम हो सकता है।

ऐसे हो सकता है निदान
प्रीऑपरेटिव निदान आमतौर पर विभिन्न इमेजिंग तकनीकों जैसे अल्ट्रासोनोग्राफी, प्लेन रेडियोग्राफी, कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी), या चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई) के जरिए मिल जाता है। इस घटना भ्रूण में भ्रूण, एक दुर्लभ स्थिति होती है जिसमें सर्जिकल हस्तक्षेप के माध्यम से प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है, जिसे उपचारात्मक माना जाता है। 

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