Operation Sheruwali: Rajouri के जंगलों में आतंकियों की घेराबंदी, 15 दिन से जारी है सबसे बड़ा ऑपरेशन

By नीरज कुमार दुबे | Jun 06, 2026

जम्मू-कश्मीर में राजौरी और पुंछ के पहाड़ी इलाकों में आतंक के खिलाफ चल रही सबसे लंबी और कठिन घेराबंदी अब निर्णायक मोड़ में पहुंचती दिख रही है। घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और नियंत्रण रेखा से सटे संवेदनशील इलाके इस समय सुरक्षा बलों की चौतरफा निगरानी में हैं। हम आपको बता दें कि राजौरी जिले के मंजाकोट सेक्टर के गंभीर मुगलान और दोरीमल के जंगलों में शुरू किया गया संयुक्त आतंक विरोधी अभियान अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का हौसला जरा भी कमजोर नहीं पड़ा है। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम लगातार संदिग्ध आतंकियों की तलाश में जंगल दर जंगल छानबीन कर रही है।

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हालांकि यह अभियान आसान नहीं है। गंभीर मुगलान और दोरीमल के जंगल अपने घने वन क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे इलाके आतंकियों के लिए छिपने की सुरक्षित जगह माने जाते हैं, लेकिन सुरक्षा बलों ने आधुनिक निगरानी तंत्र और लगातार दबाव बनाकर आतंकियों की हर हरकत पर नजर जमा रखी है। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां इलाके में आतंकियों की आवाजाही को रोकने के लिए हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल कर रही हैं। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा का घेरा इतना मजबूत कर दिया गया है कि बिना जांच किसी को भी संवेदनशील इलाकों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही।

इसी बीच, पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा से लगे अग्रिम इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है। राजौरी-पुंछ रेंज के उप महानिरीक्षक संदीप वजीर ने सवजियां और आंगनपथरी जैसे संवेदनशील अग्रिम क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की बल्कि अभियानगत तैयारियों का भी सीधा आकलन किया। सीमा से सटे इन इलाकों का रणनीतिक महत्व बेहद अहम माना जाता है क्योंकि आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशें अक्सर इन्हीं रास्तों से होती रही हैं।

दौरे के दौरान डीआईजी ने अग्रिम मोर्चों पर तैनात पुलिसकर्मियों से बातचीत की और उन्हें किसी भी उभरते खतरे से निपटने के लिए पूरी सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करना होगा तथा सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को हर हाल में बनाए रखना होगा। यह संदेश भी स्पष्ट था कि आतंक के खिलाफ जंग केवल बंदूक से नहीं, बल्कि मजबूत समन्वय और निरंतर सतर्कता से जीती जाती है।

डीआईजी ने ग्राम रक्षा गार्ड के सदस्यों और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में स्थानीय लोगों की भूमिका की सराहना की। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि सीमा क्षेत्रों में आतंक के खिलाफ सबसे मजबूत दीवार स्थानीय जनता का विश्वास और सहयोग ही है।

बहरहाल, राजौरी और पुंछ के जंगलों में जारी यह अभियान केवल आतंकियों की तलाश भर नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की उस निर्णायक लड़ाई का हिस्सा है जिसमें सुरक्षा बल हर चुनौती का डटकर सामना कर रहे हैं। दुर्गम पहाड़ियां हों या सीमा पार से मंडराता खतरा, सुरक्षा एजेंसियों का संदेश साफ है कि आतंक के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचेगा।

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