लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में मोदी का नया करिश्मा, नेहरू और इंदिरा के समकक्ष पहुँचे

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 24, 2019

‘राष्ट्रवाद’ और ‘विकास’ के नारे के साथ अपने करिश्माई व्यक्तित्व से भगवा परचम लहराने वाले नरेन्द्र मोदी भारतीय राजनीति के ऐसे व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं जो पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तर और पश्चिमी भारत में जीत का ऐसा शानदार रिकार्ड बनाया है जिसे आने वाले समय में तोड़ पाना कठिन नजर आ रहा है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव में भाजपा को कई राज्यों में 50 फीसदी से अधिक मत प्राप्त हुए। भाजपा 2014 के आम चुनाव में हासिल 282 सीटों के आंकड़े को पार करते हुए 300 सीटों को पार कर गई है।

लोकतांत्रिक इतिहास में नया नाम जुड़ा

नरेन्द्र मोदी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। नेहरू और इंदिरा के बाद मोदी पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले तीसरे प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्ट्रवाद और विकास के नारे के साथ बुलंद होते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व ने कुछ ऐसा करिश्मा किया कि देश की हिंदी पट्टी कहलाने वाले इलाके में अधिकतर लोकसभा सीटों पर भगवा परचम लहरा गया। मोदी के नेतृत्व और भाजपा के संगठनात्मक प्रबंधन की रणनीति ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मजबूत नजर आ रहे गठबंधन को तिनके की तरह हवा में उड़ा दिया।

आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भाजपा ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे कई राज्यों में अपने मत प्रतिशत में भी इजाफा किया है। इन राज्यों में उसकी वोट हिस्सेदारी 50 फीसदी से भी अधिक रही है जो कि भारतीय चुनावी इतिहास में किसी चमत्कार से कम नहीं है।

मोदी का सियासी सफर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ प्रचारक से शुरू होकर और फिर भारतीय जनता पार्टी में आने तक उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने गुजरात में 12 साल तक मुख्यमंत्री रहने के अलावा पार्टी में तमाम तरह की जिम्मेदारियों को निभाया। प्रधानमंत्री मोदी की छवि एक विकास पुरुष और भाजपा के ऐसे कर्णधार की रही जिनकी वजह से भाजपा की सत्ता में वापसी सुनिश्चित हो सकी थी।

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के अंतर्गत वडनगर में हुआ। इनके पिता का नाम दामोदर दास और माता का नाम हीराबेन है। बचपन में नरेंद्र मोदी वडनगर स्टेशन पर अपने पिता और भाई किशोर के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। 

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बचपन से ही उनका संघ की तरफ झुकाव था। 1967 में 17 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया। उन्होंने बाद में अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली। यही पर उनकी मुलाकात आरएसएस के प्रचारक लक्ष्मणराव ईनामदार से हुई थी, जो बाद में वकील साहब के तौर पर मशहूर हुए और जिन्होंने मोदी के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके बाद 1974 में वे नव-निर्माण आंदोलन में शामिल हुए। इस बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए किया। नरेंद्र मोदी को हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती भाषा का अच्छा ज्ञान है।

संघ के जरिए ही उनका परिचय भाजपा से हुआ। इसके बाद 1980 के दशक में मोदी गुजरात की भाजपा इकाई में शामिल हो गए। हालांकि भाजपा से जुड़ने और सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई सालों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक भी रहे। 1988-89 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी की गुजरात इकाई का महासचिव बनाया गया।

नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की थी। इसके बाद 1995 में मोदी को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया। 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी सौंप दी गई और इस पद पर वे अक्‍टूबर 2001 तक रहे। 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई, जिस पर वे लगातार 2014 तक बने रहे।

मोदी का केंद्र की राजनीति में पदार्पण

सितंबर 2014 में मोदी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। इसके बाद हुए चुनाव में भाजपा को उनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ और भाजपा 282 सीट जीतने में सफल रही। प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जनधन योजना, 'डिजिटल इंडिया', आयुष्मान भारत, सभी को आवास, किसान सम्मान योजना, शौचालय एवं स्वच्छता अभियान महत्वपूर्ण पहल है। अपने कार्यकाल में नोटबंदी और जीएसटी को उन्होंने महत्वपूर्ण सुधार पहल के तौर पर पेश किया।

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उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलावामा आतंकी हमले के बाद एयर स्ट्राइक को मोदी सरकार के मजबूत फैसले के रूप में देखा जा रहा है। लोकसभा चुनाव में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सहित एयर स्ट्राइक के मुद्दे को चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर रखा।

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