बूटा सिंह अपमान मामला: एनसीएससी ने आरोपियों की गिरफ्तारी और 5 दिन में रिपोर्ट मांगी

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 31, 2026

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने पिछले साल पंजाब के तरनतारन जिले में चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री दिवंगत बूटा सिंह के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के लिए अधिकारियों को कदम उठाने की सोमवार को सिफारिश की। आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाणा की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की वस्तु स्थिति रिपोर्ट पांच दिन के भीतर मांगी गई। आयोग ने जांच को शीघ्र पूरा करने और बिना किसी अनावश्यक देरी के सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की भी सिफारिश की।

सुनवाई के दौरान, पंजाब पुलिस के अधिकारी डीएसपी हरप्रीत सिंह और डीएसपी गुलजार सिंह (ईओ और साइबर अपराध) प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ता सरबजोत सिंह भी मौजूद थे। आयोग ने कहा कि पक्षकारों को सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर गौर करने के बाद उसने पिछली सुनवाई में की गई स्पष्ट सिफारिशों के बावजूद जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने में हुई देरी को लेकर गंभीर चिंता जताई। आयोग ने पांच मई को हुई पिछली सुनवाई में नियमों के अनुसार तय समय सीमा में जांच पूरी करने की सिफारिश की थी।

आयोग ने सरबजोत सिंह की उस शिकायत का भी संज्ञान लिया था, जिसमें उन्होंने कथित आरोपियों से धमकी भरे फोन आने की बात कही थी। इसके बाद आयोग ने उन्हें और उनके आश्रितों को एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15ए के तहत जरूरी सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। आयोग ने 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन सोमवार की सुनवाई में पाया कि उसके पिछले निर्देशों पर आवश्यक रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है।

आयोग ने कहा, मामले में लगातार हो रही देरी पर गंभीर रुख अपनाते हुए आयोग ने आज सिफारिश की कि संबंधित अधिकारी मामले में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कानून के अनुसार तुरंत आवश्यक कदम उठाएं और पांच दिनों के भीतर इस कार्रवाई की वस्तु स्थिति रिपोर्ट आयोग को सौंपें। आयोग ने यह भी सिफारिश की कि सक्षम प्राधिकारी जांच और गिरफ्तारी में हुई देरी के लिए जिम्मेदारी तय करे। आयोग ने कहा, ‘‘यदि संबंधित जांच अधिकारियों की ओर से जानबूझकर कर्तव्य की उपेक्षा पाई जाती है, तो कानून के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जाए, जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 4 के तहत कार्रवाई पर विचार भी शामिल है।

आयोग ने अपनी सिफारिशों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा के मुद्दे को भी विशेष गंभीरता से लिया और सरबजोत सिंह को कथित रूप से लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए अधिनियम की धारा 15ए के तहत दिल्ली और पंजाब दोनों जगह उन्हें तथा उनके आश्रितों को तत्काल और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की सिफारिश की। आयोग ने दोहराया कि पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं, गवाहों और उनके आश्रितों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण वैधानिक संरक्षण है और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि याचिकाकर्ता बिना किसी डर, दबाव या धमकी के मामले को आगे बढ़ा सकें।

प्रमुख खबरें

शेयर बाजार में मुनाफे का झांसा देकर 20.72 लाख रुपये ठगने वाला बैंक उपप्रबंधक दो साथियों समेत गिरफ्तार

Apple Investors की बंपर कमाई: Tim Cook के कार्यकाल में 25 गुना उछला Share Price और Market Value

सवाई माधोपुर: एसीबी ने 70 हजार रुपये घूस लेते रेलवे पुलिस आरक्षी को दबोचा

HDFC Bank में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी, Kaizad Bharucha बन सकते हैं नए प्रमुख, RBI की मंजूरी अहम