Parliament में विपक्ष के हंगामे का NDA ने निकाला तोड़, Mangal Milan Meeting में बनाया गया Master Plan

By नीरज कुमार दुबे | Aug 04, 2026

संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने हंगामे को ही अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक रणनीति बना लिया है। लेकिन जब दोनों सदनों में लगातार शोर-शराबे के कारण विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है, तब सत्तापक्ष ने भी जवाबी रणनीति का शंखनाद कर दिया है। मंगलवार को संसद परिसर में आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ इसी रणनीतिक तैयारी का केंद्र बनी, जहां अगले दस दिनों के सत्र के लिए ऐसी विस्तृत फ्लोर रणनीति तैयार की गई, जिससे सरकार न केवल अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ा सके, बल्कि विपक्ष को संसद के भीतर ही राजनीतिक तौर पर जबरदस्त तरीके से घेर सके। संकेत साफ हैं। जहां विपक्ष का पूरा दांव हंगामे पर टिका है, वहीं एनडीए अब समन्वय, आंकड़ों और संगठित संसदीय प्रबंधन के सहारे विपक्ष को उसी के मैदान में धराशायी करने की तैयारी में है।

इसे भी पढ़ें: एनडीए सांसदों के सत्रीय 'मंगल मिलन' के सियासी मायने

हम आपको यह भी बता दें कि हाल के दिनों में इस बैठक का नाम ‘मंगल मिलन’ रखा गया है और अब यह एनडीए के संसदीय समन्वय का सबसे महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है। संसद सत्र के दौरान प्रत्येक मंगलवार को होने वाली इस बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, सदन में विभिन्न मुद्दों पर पार्टी का रुख, सांसदों की भागीदारी और सहयोगी दलों की भूमिका तय की जाती है। शिवसेना, जनता दल (यूनाइटेड), तेलुगु देशम पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी, जद(एस), राष्ट्रवादी सहयोगी दलों सहित सभी घटकों के बीच बोलने की जिम्मेदारियां भी इसी मंच पर बांटी जाती हैं ताकि सदन में सरकार का पक्ष एकजुट और प्रभावी ढंग से रखा जा सके।

हम आपको बता दें कि आज की बैठक का एक बड़ा हिस्सा सरकार की उपलब्धियों को सांसदों तक विस्तार से पहुंचाने पर केंद्रित रहा। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खेल क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि 2014 में अपनाई गई नई खेल नीति के बाद भारत ने ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है और स्वर्ण पदकों सहित कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। सरकार का उद्देश्य इन उपलब्धियों को केवल खेल तक सीमित नहीं रखना, बल्कि इन्हें नए भारत की बदलती तस्वीर के रूप में जनता तक पहुंचाना भी है।

रोजगार के मुद्दे पर भी सांसदों के सामने विस्तृत आंकड़े रखे गए। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने बताया कि बैठक में यह जानकारी साझा की गई कि 2004 से 2014 के बीच संप्रग सरकार के कार्यकाल में जहां केवल 2.89 करोड़ युवाओं को रोजगार मिला, वहीं 2014 से 2026 के बीच लगभग 17.1 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और उनके प्रभाव पर भी विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया ताकि सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में इन तथ्यों के साथ जनता के बीच जा सकें।

बैठक में एनडीए के भीतर बढ़ते समन्वय की झलक भी दिखाई दी। भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने मुस्कुराते हुए कहा, "मंगल मिलन में मंगल ही होता है।" वहीं तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में आए वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय पहली बार इस बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वह देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हैं और एनसीपीआई पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने एनडीए की इस संगठित कार्यप्रणाली को सकारात्मक अनुभव बताया। इससे पहले भी एनसीपीआई के सांसदों ने एनडीए की संसदीय व्यवस्था और अनुशासित प्रणाली की सराहना की थी।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह बैठक विपक्ष की रणनीति के जवाब में एनडीए की जवाबी चाल भी थी। जहां विपक्ष सदन नहीं चलने देने की रणनीति पर कायम है, वहीं सरकार अब हर मुद्दे पर तथ्य, आंकड़े और समन्वित संसदीय प्रबंधन के साथ मैदान में उतरने जा रही है। यही वजह है कि अगले दस दिनों के लिए फ्लोर मैनेजमेंट को लेकर विशेष रणनीति तैयार की गई है, ताकि विधेयकों को पारित कराने के साथ-साथ हर बहस में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।

प्रमुख खबरें

DUSU Election में ABVP ने NSUI को 3-0 से हराया, छात्र सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देने का वादा

Chess Olympiad: D Gukesh और Arjun Erigaisi की जीत से भारत ने Spain को 3-1 से हराया

Gurugram में 19वीं मंजिल से गिरे 2 मजदूर, 1 की मौत के बाद निर्माण स्थल पर भारी हंगामा

Asian Senior Wushu Championship: भारत करेगा 2028 में मेजबानी, 42 देशों के 500 खिलाड़ी होंगे शामिल