क्राउडफंडिंग के जरिये जरूरतमंदों को मिल रही है हर प्रकार की सहायता

By ललित गर्ग | Dec 28, 2018

भारत में क्राउडफंडिंग का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, विदेशों में यह स्थापित है, लेकिन भारत के लिये यह तकनीक एवं प्रक्रिया नई है, चंदे का नया स्वरूप है जिसके अन्तर्गत जरूरतमन्द अपने इलाज, शिक्षा, व्यापार आदि की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकता है। न केवल व्यक्तिगत जरूरतों के लिये बल्कि तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों और जनकल्याण उपक्रमों को पूरा करने के लिए लोग इसका सहारा ले रहे हैं। भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में इसका प्रयोग अधिक देखने में आ रहा है। अभावग्रस्त एवं गरीब लोगों के लिये यह एक रोशनी बन कर प्रस्तुत हुआ है। इसे भारत में स्थापित करने एवं इसके प्रचलन को प्रोत्साहन देने के लिये क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु के प्रयास उल्लेखनीय हैं।

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इम्पैक्ट गुरु डॉट कॉम के माध्यम से जुटाये 5.50 लाख रुपये का उपयोग 15,000 कहानी किताबों को स्थानीय भाषा भोटी में अनुवाद, संदर्भ, प्रिंट एवं वितरित करने का लक्ष्य हासिल करने में किया है। लद्दाख के दूरस्थ स्कूलों में खेल का मैदान स्थापित करने में भी इस आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। ऊंचे पहाड़ों के बीच बसे लद्दाख में 900 सरकारी स्कूल हैं, जहां अंग्रेजी को मुख्य भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। यद्यपि कुछ बच्चे इसके अभ्यस्त हो गए हैं, फिर भी ऐसे अधिसंख्य बच्चे हैं जो लद्दाख की मूल भाषा- भोटी या लद्दाखी में शिक्षित होना पसंद करते हैं क्योंकि वे इसे सहजता और सरलता से समझ पाते हैं और उनके बीच में लोकप्रिय है। जिसे स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। पहली अंग्रेजी भाषा है और दूसरी हिंदी या उर्दू एवं तीसरी भोटी या लद्दाखी भाषा है। अपनी मूल भाषा में अध्ययन के निर्देश की कमी के कारण ये बच्चे अक्सर बड़ी परीक्षाओं में असफल होते हैं।

लद्दाखी बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से संगठित 17000 फीट फाउंडेशन के योगदान के कारण से परिदृश्य में काफी बदलाव आया है। सुजाता साहू द्वारा शुरू किया गया यह संगठन सन् 2012 में शुरू हुआ और सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने की दिशा में काम करता है। इस एनजीओ ने 250 स्कूलों में पुस्तकालय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इनमें से कुछ संस्थानों में 140 खेल के मैदान भी निर्मित किए हैं। अब 17000 फीट फाउंडेशन ने स्कूली बच्चों के समग्र विकास के लिए भोटी भाषा में कहानी की किताबों का अनुवाद करने का बीड़ा उठाया है। 2015 में इस फाउंडेशन ने भोटी भाषा में पुस्तकालयों की पुस्तकों का अनुवाद करने का उपक्रम शुरु किया है। 21,000 कहानी पुस्तकों के अनुवाद करने के लक्ष्य के साथ यह आगे बढ़ रहा है। इस एनजीओ ने सिर्फ अनुवाद पर ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि लेह जिले में 370 स्कूलों में 15,000 पुस्तकों को अनुदित, संदर्भित और वितरित करने का नया लक्ष्य हाथ में लिया है। इस अनूठे कार्य के लिए उनके सम्मुख आर्थिक संसाधनों की कमी आने लगी तो उन्होंने क्राउडफंडिंग का सहारा लेने का निर्णय लिया। इस कार्य के लिए उन्होंने इम्पैक्ट गुरु डॉट कॉम के माध्यम से धन जुटाने का अभियान शुरू किया और 2.39 लाख रुपये जुटाये गए।

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इस प्रतिक्रिया से रोमांचित होकर उन्होंने लद्दाख के दूरस्थ विद्यालयों में एक खेल का मैदान स्थापित करने के लिए धन जुटाने के इरादे से इम्पैक्ट गुरु डॉट कॉम पर दूसरा अभियान चलाया, जिससे छात्रों के लिए समग्र शिक्षण एवं खेलकूद का वातावरण तैयार किया जा सके। इस अभियान ने भी तय लक्ष्य को पार कर 3.21 लाख रुपये जुटाए हैं।

एनजीओ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता स्टैनबा ग्याल्टान का मानना है कि इस एनजीओ के लिए क्राउडफंडिंग का रास्ता सहज और सरल है क्योंकि इस माध्यम से आपके जीवन के सभी क्षेत्रों के लोग आपके मिशन एवं विजन को देखते हुए दान करते हैं। कॉरपोरेट क्षेत्र की कंपनियों के लिए सीएसआर नीति के कारण दान करने की अनिवार्यता है, भले ही वे नहीं चाहते हैं। लेकिन क्राउडफंडिंग के अंतर्गत ऐसा नहीं है, लोग वहां स्वेच्छा से दान करते हैं क्योंकि वे वास्तव में आपकी मदद करना चाहते हैं और यह एक बड़ी भावना है।’

इम्पैक्ट गुरु डॉट कॉम के माध्यम से मिली इन सफलताओं के बाद, 17000 फीट फाउंडेशन की भविष्य की अनेक अन्य वास्तविक उच्च महत्वाकांक्षाएं हैं। वे अब डिजिटल पुस्तकालय स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा हालांकि लद्दाख उनका प्राथमिक लक्ष्य क्षेत्र है, वे अरुणाचल जैसे अन्य उत्तरी क्षेत्रों में जाने की भी कोशिश कर रहे हैं। यह उनका अगला लक्ष्य है।

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2012 में स्थापित 17000 फीट फाउंडेशन की सुजाता ने दूर दराज के गांवों में लद्दाखी बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने और स्थानीय निवासियों को आमदनी के अवसर दिलाने के लिए इस फाउंडेशन की स्थापना की। इस फाउंडेशन के माध्यम से सुजाता ने अब तक स्कूलों में 50,000 किताबें दान की हैं तथा 20 से भी अधिक स्कूलों में क्लास रूम फर्नीचर उपलब्ध कराए हैं। उनका फाउंडेशन 8000 छात्रों की सीधे तौर पर और करीब 30,000 छात्रों की अप्रत्यक्ष मदद कर रहा है। साथ ही, उन्होंने 370 स्कूलों को गोद भी लिया है, जिसमें 60 निजी स्कूल हैं। सुजाता 675 सरकारी शिक्षकों को प्रशिक्षण देने में भी सक्रिय हैं। यह एक ऐसी शख्सियत है जिसने शिक्षा को वास्तव में एक नयी ऊंचाई प्रदान की है। उनके मिशन को सफलता की नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिये क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु एक उम्मीद बन कर सामने आया है। इसके कार्यकारी अधिकारी श्री पीयूष जैन हैं, जिनका मानना है कि आने वाले समय में क्राउडफंडिंग न केवल जीवन का हिस्सा बनेगा बल्कि अनेक बहुआयामी योजनाओं को आकार देने का आधार भी यही होगा। उन्होंने बताया कि भारत में हर छोटी-बड़ी जरूरतों के लिये अब क्राउडफंडिंग का सहारा लिया जा रहा है। वे इस बात की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं कि आम नागरिक को सेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिये क्राउडफंडिंग को बढ़ावा देना चाहिए। 

इम्पैक्ट गुरु ने क्राउडफंडिंग के माध्यम से करोड़ों रूपयों की चिकित्सा सहायता एवं अन्य जरूरतों के लिये आर्थिक संसाधन जुटाये हैं। केवल चिकित्सा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी क्राउडफंडिंग का प्रचलन बढ़ रहा है। यश चैरिटेबल ट्रस्ट ने अपने ‘कैफे अर्पन’ को खोलने के लिए अपेक्षित धन की पूर्ति के लिए इम्पैक्ट गुरु के जरिये क्राउडफंडिंग का सहारा लिया। विकार ग्रस्त युवकों द्वारा संचालित यह एक अनूठा और अद्वितीय कैफे है। इम्पैक्ट गुरु ने इसके लिये निःस्वार्थ सेवाएं दीं और वे लक्ष्य राशि से अधिक धन जुटाने में सफल हुए। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम भूमिका निभा सकती है क्योंकि क्राउडफंडिंग से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे हैं जो कि अब कला, विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन को समृद्ध करने की भी हो जायेगी। ऐसा होने से क्राउडफंडिंग की उपयोगिता एवं महत्ता सहज ही बहुगुणित होकर सामने आयेंगी।

-ललित गर्ग

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