Neelam Sanjiva Reddy Birth Anniversary: आंध्र प्रदेश के सीएम से लेकर देश के राष्ट्रपति पद तक पहुंचे नीलम संजीव रेड्डी

By अनन्या मिश्रा | May 19, 2023

भारत के छठें राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को एक राजनेता और प्रशासक के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में बचपन से ही भाग लिया था। स्वतंतत्रा के पहले व बाद में उनको एक अच्छे राजनेता के तौर पर उच्च स्थान पर रखा गया। 19 मई को नीलम संजीव रेड्डी का जन्म हुआ था। वह भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे, जिनको पहली बार में राष्ट्रपति पद के लिए असफलता मिली थी। वहीं दूसरी बार में इनका राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुआ था।  

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में 19 मई, 1913 को मध्यम वर्गीय परिवार में नीलम संजीव रेड्डी का जन्म हुआ था। इनके पिता नीलम चिनप्पा रेड्डी कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ता और प्रसिद्ध नेता टी. प्रकाशम के साथी थे। रेड्डी ने अपनी शुरूआती शिक्षा थियोसोफिकल हाई स्कूल अडयार, मद्रास से पूरी की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा पाने के लिए आर्ट्स कॉलेज अनंतपुर में एडमिशन ले लिया। लेकिन साल 1929 में गांधीजी से मुलाकात के बाद इनका जीवन पूरी तरह से बदल गया।

राजनैतिक सफर

गांधीजी ने रेड्डीजी को देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने को प्रेरित किया। गांधीजी की बातों और उनके कार्यों का उन पर काफी गहरा असर पड़ा। बता दें कि महज 18 साल की उम्र में वह स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़े। अंग्रेजों के खिलाफ कई युद्धों में वह डटकर खड़े रहे। इस दौरान उन्होंने विदेशी वस्त्रों का भी त्याग कर दिया और खादी पहनावे को अपनाया था। रेड्डी जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत कांग्रेस के साथ किया। वह युवा कांग्रेस के सदस्य बनकर सभी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे। वहीं साल 1936 में महज 23 साल की आयु वह आंध्र प्रदेश प्रोविशिनल कांग्रेस कमिटी के सचिव चुने गए। 

इसे भी पढ़ें: KM Cariappa Death Anniversary: भारत के पहले सेनाध्यक्ष थे फील्ड मॉर्शल केएम करिअप्पा

अपनी योग्यता के कारण वह इस पद पर 10 वर्षों तक कार्यरत रहे। इसके बाद साल 1946 में रेड्डीजी मद्रास विधानसभा के लिए चुने गए और इस दौरान वह मद्रास कांग्रेस विधान मंडल दल के सचिव निर्वाचित हुए। देश को आजादी मिलने के बाद 1949 में नीलम संजीव रेड्डी संयुक्त मद्रास राज्य में नशाबंदी, आवास, मद्य निषेध एवं वन मंत्री बने। वहीं 1951 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह आंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए खड़े हुए और इसमें उन्हें जीत भी हासिल हुई। साल 1952 में वह आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने। 

इसके बाद 1956 में जब आंध्र प्रदेश राज्य का गठन  हुआ तब उन्हें मुख्यमंत्री के पद का कार्यभार सौंपा गया। हालांकि साल 1959 में उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। वह एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर काम करने लगे। इसके बाद साल 1964 में नीलम संजीव रेड्डी एक बार फिर आंद्र प्रदेश के सीएम बनें। लेकिन इस बार भी उन्होंने खुद ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था। 1977 में वह लोकसभा के स्पीकर नियुक्त हुए। इस दौरान उनको बेस्ट स्पीकर का खिताब मिला था। इसके बाद वह देश के राष्ट्रपति बनें। राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान रेड्डीजी ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए। 1958 में नीलम संजीव रेड्डी को श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, त्रिमूर्ति द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।

मृत्यु

साल 1966 को नीलम संजीव रेड्डी का 83 साल की उम्र में उनके पैतृक स्थान में निधन हो गया था। उनका मिलनसार स्वभाव, दूरदर्शी नेतृत्व और योग्यता ने उनको जीवन के सभी क्षेत्रों में लोगों का प्रिय बना दिया था।

प्रमुख खबरें

तपती धरती, झुलसता जीवन: जनता के समक्ष हीटवेव की चुनौती

जन अपेक्षाओं पर खरे उतरने की एक मुख्यमंत्री की सकारात्मक पहल

CM Omar Abdullah कहां हैं? Jammu में बिजली-पानी संकट पर BJP ने छेड़ा Poster Campaign

Bengaluru में Cockroach Janta Party पर एक्शन, गृह मंत्री Parameshwara बोले- पुलिस का फैसला स्वतंत्र