By अंकित सिंह | May 18, 2026
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दाखिल किया है, जिसमें उन पर संसद और उसकी समितियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों का आरोप लगाया गया है। यह नोटिस राज्यसभा की कार्य प्रक्रिया एवं संचालन नियमों के नियम 187 के तहत दाखिल किया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रमेश ने लिखा कि मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ संसद और संसदीय समितियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में राज्य परिषद की कार्य प्रक्रिया एवं संचालन नियमों के नियम 187 के तहत विशेषाधिकार का प्रश्न उठाया है।
नोटिस के अनुसार, प्रधान ने कहा कि मैं संसदीय स्थायी समिति की चेतावनियों पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (HLCE)/राधाकृष्णन समिति के बारे में बात करूंगा। संसदीय स्थायी समिति में विपक्ष के सदस्य हैं। वे चीजों को एक विशेष तरीके से लिखते हैं, यह आप भी जानते हैं। इसलिए, मैं स्थायी समिति पर कुछ नहीं बोलूंगा। रमेश ने इन टिप्पणियों को अत्यंत निंदनीय और बेहद अपमानजनक बताते हुए कहा कि इनसे संसदीय संस्थाओं को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां संसद का ही विस्तार हैं और अक्सर इन्हें लघु संसद माना जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यपालिका की विधायिका के प्रति जवाबदेही भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूलभूत सिद्धांत है। इसके अलावा, रमेश ने कहा कि ये टिप्पणियां संसद, संसदीय समितियों, सभी राजनीतिक दलों से चुने गए संसदीय समिति के सदस्यों और स्वयं भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के प्रति उनकी अवमानना को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
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