By अंकित सिंह | Oct 24, 2026
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि न तो वह और न ही उनका छात्र संगठन दिल्ली पुलिस द्वारा मांगे गए 'पीस बॉन्ड' (शांति बनाए रखने के मुचलके) पर हस्ताक्षर करेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उनके आवेदन को स्वीकार करने से इनकार किए जाने के बाद, वे इस नोटिस को आगे चुनौती देंगी। नेहा बोरा ने कहा कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष होने वाली कार्यवाही में 'प्राकृतिक न्याय' (natural justice) के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह SEM कोर्ट के सामने पेश होंगी। कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह उन्हें उन दस्तावेजों या सामग्री को उपलब्ध कराए, जिनके आधार पर यह कार्यवाही की जा रही है।
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने SEM कोर्ट से कहा है कि वे हमारे खिलाफ मौजूद सामग्री हमें दिखाएं। उन्होंने आदेश के पेज 34 का हवाला देते हुए कहा कि इसके अनुसार SEM कोर्ट को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। नेहा बोरा ने आगे कहा कि वह SEM कोर्ट के सामने पेश होंगी और इस कार्यवाही का विरोध करेंगी। शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने कहा कि मैं इस स्तर पर रिट याचिका को खारिज कर रहा हूं। कोर्ट ने SEM को यह भी निर्देश दिया कि वे नेहा बोरा को वह सामग्री उपलब्ध कराएं, जिस पर यह कार्यवाही आधारित है।
नेहा बोरा ने नोटिस के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि 16 अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन अलोकतांत्रिक नहीं था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों (खासकर महिलाओं) पर किए गए लाठीचार्ज का नतीजा थी। उन्होंने प्रदर्शन की योजना के बारे में पुलिस के दावे को भी गलत बताया और कहा कि आयोजकों ने मंडी हाउस में इकट्ठा होने के लिए कहा था, न कि कनॉट प्लेस में।