By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 05, 2026
नयी दिल्ली, चार सितंबर विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ के बाद 275 भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि 166 अन्य लोगों को बचा लिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि चीन से नेपाल में 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 26 अगस्त को नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद से भारत ने करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल को भेजी है।
हम नेपाल सरकार के साथ लगातार करीबी संपर्क में हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम इस संबंध में नेपाल के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हैं। अब तक 166 भारतीय नागरिकों को बचाया गया है और 1,907 भारतीय नागरिक चीन से सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच चुके हैं।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘चीन की आधिकारिक सूचना के अनुसार, चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कोई भी भारतीय यात्री फंसा हुआ नहीं है।’’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत नेपाल सरकार की जरूरतों के अनुसार उसकी सहायता जारी रखेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम नेपाल सरकार के अनुरोध पर और अधिक फॉरेंसिक किट, बेली पुल और अन्य सामग्री भेजने की योजना बना रहे हैं।’’ जायसवाल ने बताया कि भारत अब तक सात विमानों के जरिए करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है।
उन्होंने कहा, ‘‘राहत सामग्री के अलावा, हमने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए 54 कर्मियों को भी भेजा है। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फॉरेंसिक विशेषज्ञ और पांच सदस्यीय चिकित्सा दल शामिल हैं। हमारे बचाव और फॉरेंसिक दल मौके पर तैनात हैं और वे नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’’ भारत की ओर से राहत सामग्री की पहली खेप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 26 अगस्त को नेपाल के अपने समकक्ष बालेन्द्र शाह से बातचीत करने के कुछ घंटे बाद भेजी गई थी।
मोदी ने शाह को हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से मुख्य रूप से मध्य नेपाल में 35 पुल, 45 झूला पुल और 40 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों को नुकसान पहुंचा है। जायसवाल ने कहा कि भारत ने नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद तुरंत कदम उठाया और दोहराया कि वह देश में पुनर्निर्माण और राहत कार्यों में लगातार सहयोग करता रहेगा।
नेपाल में आई बाढ़ के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन से जुड़े सवाल पर जायसवाल ने कहा कि भारत का लगातार यह रुख रहा है कि यह एक साझा चुनौती है और इस संबंध में कार्रवाई ‘‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं’’ के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए।