By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 09, 2026
काठमांडू, नौ सितंबर नेपाल पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे उन ‘झूठे और निराधार’ दावों से सावधान रहने को कहा है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी गई राहत सामग्री ले ली, लेकिन उसका वितरण नहीं किया। समाचार पोर्टल ‘रातोपति डाट कॉम’ के अनुसार, यह चेतावनी ‘सीपीएन (यूएमएल) के सचिव महेश बस्नेत के उन आरोपों के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राहत सामग्री सेना और पुलिस की बैरकों तथा कार्यालयों में रखी जा रही है और कुछ खाद्य सामग्री सड़ने के लिए छोड़ दी गई। नेपाल पुलिस ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों को निशाना बनाकर ‘‘निराधार, मनगढ़ंत और भ्रामक’’ सूचनाएं प्रसारित किए जाने की जानकारी उसके संज्ञान में आई है।
बुधवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 1,365 हो गई, जबकि 5,326 लोग लापता हैं। बयान में कहा गया कि सुरक्षा बलों के जवान फंसे हुए और प्रभावित लोगों को बचाने, लापता लोगों की तलाश करने, घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, बरामद शवों के रखरखाव और राहत सामग्री वितरित करने में जुटे हुए हैं। बयान में कहा गया कि आपदा के दौरान अपुष्ट आरोपों से, बचाव और राहत कार्यों में तैनात सुरक्षा कर्मियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है, जनता के बीच सुरक्षा एजेंसियों के प्रति अविश्वास पैदा हो सकता है और आपदा प्रबंधन से जुड़े संवेदनशील प्रयासों में बाधा आ सकती है।
समाचार पत्र ‘द हिमालयन टाइम्स’ के अनुसार, नेपाल पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके कब्जे में कोई राहत सामग्री नहीं है। पुलिस ने जनता और सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों या अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार न करें, जिनसे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है या प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे सुरक्षा कर्मियों का मनोबल गिर सकता है। बस्नेत ने आरोप लगाया था कि एक आश्रय स्थल में पीड़ितों ने भोजन की कमी की शिकायत की, जबकि राहत सामग्री सेना और पुलिस के पास रखी हुई थी।
उन्होंने दावा किया था कि सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों को सड़ने के लिए छोड़ दिया गया तथा “वन-डोर सिस्टम” के तहत राहत सामग्री सुरक्षा प्रतिष्ठानों के भीतर रखी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि हेलीकॉप्टरों को बचाव अभियान चलाने से रोका गया। साथ ही उन्होंने आपदा से निपटने के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और स्वयंसेवी संगठन हामी नेपाल की आलोचना की।