भारत की पीठ पर नेपाल ने छुरा घोंपा! बालने शाह ने लगाया बैन

By अभिनय आकाश | Jun 09, 2026

एक तरफ भारत ने हमेशा नेपाल के लिए अपने दरवाजे और दिल खोल कर रखे। लेकिन दूसरी तरफ नेपाल ने एनन सीजन के वक्त भारतीय किसानों और व्यापारियों की पीठ में छुरा घोप दिया। दरअसल नेपाल सरकार ने यानी बालेन शाह की सरकार ने अचानक एक ऐसा फरमान सुनाया जिससे ना केवल भारत के फल निर्यातक सदमे में है बल्कि खुद नेपाल की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। नेपाल ने भारतीय आम और कई प्रमुख फलों के आयात पर अघोषित और अचानक प्रतिबंध लगा दिया। ऐसे में सवाल है आखिर क्यों नेपाल अपनी ही जनता को भूखा रखने और महंगी कीमतों की आग में झोंकने पर तुला है? क्या यह सिर्फ एक व्यापारिक फैसला है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश।

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गुणवत्ता कम और कीमत चार गुना। नेपाली जनता का कहना है कि जो फल पहले आम आदमी खरीद सकता था अब वह सिर्फ रईसों की मेज की शोभा बढ़ा रहा है। सिर्फ आम ही नहीं केले और अन्य भारतीय फलों की कमी से पूरा मार्केट क्रैश होने की स्थिति में आ गया है। नेपाल के फल और सब्जी व्यापारियों ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि घरेलू कृषि को बढ़ावा देना सुनने में अच्छा लगता है। लेकिन क्या नेपाल के पास इसके लिए बुनियादी ढांचा है। व्यापारियों का तर्क है कि नेपाली आम का सीजन महज 2 महीने का होता है। बाकी के 10 महीने नेपाल क्या खाएगा? बिना किसी कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था किए और बिना किसी पैदावार को बढ़ाए भारत से आयात रोकना अपने ही नाक काटने जैसा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अगर यह प्रतिबंध एक हफ्ते और जारी रहा तो नेपाल में फलों की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो जाएगी और आम जनता का गुस्सा सरकार के लिए संभालना मुश्किल हो जाएगा। कई व्यापारियों ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें करोड़ों का आर्थिक नुकसान हो चुका है जिसकी भरपाई नामुमकिन है। अब बात करते हैं उस छुरे की जो भारत की पीठ में नेपाल या फिर यूं कह लें कि बाल शाह ने घोपा है। भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के हजारों किसान नेपाल को होने वाले निर्यात पर निर्भर रहते हैं। जब फसल तैयार है, मंडियों में माल लदा है, तब नेपाल का यह फैसला भारतीय किसानों की मेहनत पर पानी फेरने जैसा है।

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