Nepal Tibet सीमा पर आई Flood में 288 भारतीय लापता, राहत कार्य में जुटा MEA

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 27, 2026

(फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 27 अगस्त नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कम से कम 288 भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि लगभग 200 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि भारत दोनों देशों के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है, ताकि बचाव अभियान में समन्वय किया जा सके।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शीर्ष अधिकारियों तथा काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि भारत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए “पुरजोर प्रयास” कर रहा है। भारत ने बुधवार रात से दो सैन्य परिवहन विमानों के जरिए कुल 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है और अधिक राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया जारी है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत की तत्काल प्राथमिकता लापता भारतीयों का पता लगाना और उन्हें बचाना तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि नेपाल में लापता भारतीयों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोग और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के पर्यटक समूह शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘288 भारतीय नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें वे 73 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे थे।

काठमांडू स्थित हमारा दूतावास इन लोगों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए परियोजना प्रमुख के संपर्क में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, तमिलनाडु के 37 और 49 भारतीय नागरिकों के दो अलग-अलग समूह हैं, जो सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।’’ जायसवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक अलग समूह भी था, जो सम्राट ट्रैवल्स की मदद से रसुवा जिले के तिमुरे गया था। उन्होंने कहा कि वहीं, कुछ अन्य राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था। उन्होंने कहा कि केरल के 33 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को बचा लिया है... हमें जानकारी मिली है कि मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन के क्षेत्र में फंसे हुए हैं।’’ जायसवाल ने कहा कि तिब्बत की ओर फंसे लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने सुरक्षित निकाले जाने के लिए सहायता मांगी है। उन्होंने कहा कि इनमें से 95 लोग गारचेन में हैं और नेपाल में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, जबकि चार लोग जिलॉन्ग शहर में और 13 लोग जुतुलपुक में हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों में स्थिति लगातार बदल रही है और भारत भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।

उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद जयशंकर ने कहा, ‘‘बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं।” जयशंकर ने कहा कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले के साथ-साथ राहत प्रयासों को लेकर भी नेपाली पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।’’ भारत ने बृहस्पतिवार को सैन्य परिवहन विमान से 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी खेप नेपाल भेजी। भारत ने बुधवार को 10 टन एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सामग्री भेजी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार और करीबी संपर्क में है। हम जारी राहत प्रयासों को मजबूती से समर्थन देते रहेंगे।’’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से बात की थी और वहां बाढ़ से हुई जान-माल की क्षति पर संवेदना व्यक्त की थी। साथ ही, उन्होंने कहा था कि भारत पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।

मोदी ने कहा था कि भारत के लोग इस कठिन समय में नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

प्रमुख खबरें

Nepal Flood के बाद Glacial Lakes का वैज्ञानिक आकलन जरूरी, शोधकर्ताओं ने जताई चिंता

Sugar Mill Prices में 20% की भारी गिरावट, Retail Market में आम आदमी के लिए जल्द सस्ती होगी चीनी

Digital Arrest का शिकार बना Bhopal का बुजुर्ग दंपति, ठगों ने हड़पे ₹22 लाख

Pralhad Joshi बोले: 500 GW Green Energy लक्ष्य के लिए 30 लाख करोड़ का निवेश जरूरी