नेपाली पीएम का नया खेल, भारत से 100 रुपए से ज्यादा खर्च तो देना होगा टैक्स

By अभिनय आकाश | Apr 17, 2026

क्या अब 100 रुपए की छोटी सी खरीदारी भी बन सकती है बड़ी मुसीबत? क्या सीमा पार सामान लाना अब जेब पर भारी पड़ने वाला है?  क्या इस नए फैसले से बदल जाएगी लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी? दरअसल नेपाल सरकार ने हाल ही में भारत से होने वाली छोटी खरीदारी पर एक महत्वपूर्ण नीति लागू की है। जिसके तहत 100 रुपए से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य देश में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना और राजस्व बढ़ाना बताया जा रहा है। लेकिन इसका असर खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और छोटे व्यापारियों पर साफ दिखाई देने वाला है। भारत नेपाल सीमा के पास रहने वाले लोग लंबे समय से रोजमर्रा की जरूरतों के लिए एक दूसरे के बाजारों पर निर्भर रहे हैं। खासकर नेपाल के नागरिक अक्सर सस्ते और आसानी से उपलब्ध सामान के लिए भारतीय बाजारों का रुख करते हैं। दाल, चावल, तेल, नमक, चीनी, सब्जियां और दवाइयों जैसी जरूरी चीजें लोग भारत से खरीद कर अपने घरों का खर्च चलाते हैं। ऐसे में ₹100 से अधिक की खरीदारी पर कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित कर सकता है। नई व्यवस्था के अनुसार इस तरह की खरीदारी पर 5% से लेकर 80% तक का कस्टम ड्यूटी लगाया जा सकता है। इसका मतलब है कि छोटी-छोटी खरीदारी भी अब महंगी पड़ सकती है। 

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खासतौर पर मजदूर दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग और कम आय वाले परिवार जो रोज ₹200 से ₹300 तक का सामान खरीद कर अपना गुजारा करते हैं। इस नियम से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। नेपाल सरकार के इस कदम के पीछे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की मंशा बताई जा रही है। सरकार चाहती है कि लोग स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल करें जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। इसके अलावा अवैध व्यापार और सीमा पार होने वाली अनियमित गतिविधियों को नियंत्रित करना भी इस नीति का एक उद्देश्य है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले का असर बड़े कारोबारियों से ज्यादा आम जनता और छोटे व्यापारियों पर ही पड़ता है। सीमावर्ती इलाकों में इस फैसले को लेकर चिंता का माहौल है। स्थानीय प्रशासन द्वारा लाउडस्कर के जरिए लोगों को नए नियमों की जानकारी दी जा रही है। जिससे लोगों में असमंजस और परेशानी बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि यह फैसला गरीब तबके के लिए मुश्किलें खड़ी करेगी क्योंकि वे सस्ते विकल्पों पर ही निर्भर रहते हैं। इसके अलावा इस आदेश में किसी भी सरकारी संस्था या गैर सरकारी संगठन को कोई छूट नहीं दी जाएगी जिससे इसका दायरा और भी व्यापक हो गया है। 

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