By Ankit Jaiswal | Aug 04, 2026
शेयर बाजार में मंगलवार को नेस्ले इंडिया के शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 2.75 प्रतिशत गिरकर 1,487.90 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि हालिया तिमाही नतीजों में कंपनी ने कई मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ प्रमुख वित्तीय संकेतकों में कमजोरी और मुनाफावसूली के चलते निवेशकों का रुख सतर्क दिखाई दिया।
बता दें कि मार्च 2026 तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में राजस्व और शुद्ध लाभ दोनों में कुछ कमी आई है। मार्च तिमाही में कंपनी का राजस्व 6,747.79 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 1,114.11 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इसके बावजूद सालाना आधार पर कंपनी का प्रदर्शन मजबूत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो कंपनी का कुल राजस्व 23,154.60 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 20,201.56 करोड़ रुपये था। हालांकि वर्ष 2024 की तुलना में राजस्व अब भी कुछ कम है। इसी तरह शुद्ध लाभ वर्ष 2024 के 3,932.84 करोड़ रुपये से घटकर वर्ष 2026 में 3,544.60 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी की प्रति शेयर आय यानी ईपीएस में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में यह 40.79 रुपये थी, जो वर्ष 2026 में घटकर 18.15 रुपये रह गई। इसी अवधि में लाभांश और इक्विटी पर प्रतिफल जैसे प्रमुख संकेतकों में भी कमी देखने को मिली है। हालांकि कंपनी पर कर्ज का बोझ लगभग नहीं है, जो उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाता है।
नकदी प्रवाह के मोर्चे पर कंपनी की स्थिति बेहतर हुई है। परिचालन गतिविधियों से मिलने वाला नकदी प्रवाह वर्ष 2024 के 4,174 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2026 में 5,047 करोड़ रुपये हो गया। वहीं शुद्ध नकदी प्रवाह भी सकारात्मक होकर 1,244 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
बता दें कि नेस्ले इंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में अपने निवेशकों को लगातार लाभांश दिया है। वर्ष 2026 में कंपनी ने अंतिम लाभांश के साथ विशेष और अंतरिम लाभांश का भी ऐलान किया था। इससे पहले कंपनी ने शेयर विभाजन और एक के बदले एक बोनस शेयर भी जारी किए थे।
हाल ही में कंपनी ने बताया था कि जून 2026 तिमाही में बिक्री में 25.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें उसके सभी प्रमुख उत्पाद वर्गों का योगदान रहा। इसके बावजूद मंगलवार को शेयर में गिरावट दर्ज हुई, जिससे साफ है कि निवेशक केवल तिमाही नतीजों के बजाय कंपनी की दीर्घकालिक लाभप्रदता, मूल्यांकन और भविष्य की वृद्धि की संभावनाओं पर भी नजर बनाए हुए हैं।