By अभिनय आकाश | Nov 02, 2026
19 साल तक इजराइल की राजनीति में दबदबा बनाए रखने वाले बेंडमिन नेतन्याहू की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोर्ट ने सरकार बनाने के लिए ऐसा सियासी दाव चला जिसने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया। आइजनकोर्ट ने नई सरकार बनाने के लिए चार बड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें हरेरी समुदाय को सेना में भर्ती करना, इजराइल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश बनाए रखना और गजा से हमास का शासन खत्म करना यह सब शामिल है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं, उन्होंने भी आइजन कोड को समर्थन देने का फैसला किया है। यानी विपक्षी खेमे का आंकड़ा 48 से बढ़कर 67 तक पहुंच सकता है। जो बहुमत के 61 के आंकड़े से काफी ज्यादा है। ऐसे में सवाल है कि क्या इजराइल में नेतन्याहू का दौर खत्म होने वाला है? 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में 120 सीटों वाली संसद यानी कि 69 में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत है। लेकिन नतीजों में नेतन्याहू का गठबंधन सिर्फ 53 सीटों पर सिमट गया।
हमास को आतंकी संगठन के रूप में मान्यता दी जाए और गजा में उसकी शासन चलाने की क्षमता और सैन्य ताकत खत्म की जाए। 120 सीटों वाली इजराइली संसद में सरकार बनाने के लिए बहुमत है 61। तो नेतन्याहू गठबंधन के पास है 53 सीटें। आयजनकोर्ट का विपक्षी खेमा है 48 सीटों पर और अरब पार्टियों के पास है 19 सीटें। तो यानी कि सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका है 48 और 19 को मिला के 67 सीटें। अब पार्टीवार सीटों की बात करें तो नेतन्याहू का खेमे की सीटें लिक्विड की 27 यूनाइटेड टोरा जुडिज्म सात ओजमा यहूदित सात शास छह रिलीजियस जायनिज्म छह। इसको मिला के कुल हुई 53 सीटें। आइज़न कोर्ट के खेमे की बात करें तो याशार में 21 सीटें बियाद की 12 सीटें डेमोक्रेट्स की आठ येल बेतेनू की सात कुल मिलाकर 48 सीटें अब अरब पार्टियों की बात करें तो जॉइंट लिस्ट की 11 राम की आठ कुल मिलाकर 19 सीटें इजराइल में चुनाव जीतना और प्रधानमंत्री बनना दो अलग-अलग प्रक्रिया हैं। किसी भी पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिलता इसलिए दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन बनाना जरूरी होता है।