By अंकित सिंह | Feb 12, 2026
असम राज्य में 14 फरवरी को एक ऐतिहासिक घटना घटने जा रही है, जब डिब्रूगढ़ जिले के मोरान बाईपास पर एक आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का उद्घाटन किया जाएगा। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह ईएलएफ पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा है। भारत के प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करेंगे और इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह सुविधा राजमार्ग पर एक चिन्हित खंड को आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे के रूप में उपलब्ध कराएगी, जो लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों के आपातकालीन लैंडिंग और टेक-ऑफ संचालन को संभालने में सक्षम होगा। यह दूरस्थ क्षेत्रों में मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों के दौरान भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह अवसर राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस अवसर पर प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, राज्यपाल और असम के मुख्यमंत्री के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिक और सैन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। इसी बीच, इस पहल के तहत, भारतीय वायु सेना के एक लड़ाकू विमान ने गुरुवार को मोरान राजमार्ग पर स्थित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) पर सफलतापूर्वक परीक्षण लैंडिंग की। विमान की गर्जना पूरे क्षेत्र में गूंज उठी, जिससे जबरदस्त उत्साह का माहौल छा गया। इस सफल परीक्षण से पहले, सभी तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं की जाँच की गई थी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस और वायु सेना द्वारा एक सख्त सुरक्षा घेरा बनाया गया था।
हालांकि आम जनता को पास आने की अनुमति नहीं थी, फिर भी बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और विभिन्न स्थानों से आए पर्यटकों ने दूर से इस ऐतिहासिक क्षण को देखा। 4.2 किलोमीटर लंबा यह राजमार्ग अब एक रनवे के रूप में भी काम करेगा। मोरान का यह 4.2 किलोमीटर लंबा राजमार्ग अब केवल एक सड़क नहीं रहेगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर एक मजबूत रनवे के रूप में भी कार्य करेगा। युद्ध या आपातकाल की स्थिति में, इस ईएलएफ (इलेक्ट्रॉनिक लैंडिंग लैंड) का उपयोग वायु सेना के विमानों के उतरने और उड़ान भरने के लिए किया जाएगा।
यह रनवे राफेल, सुखोई, हरक्यूलिस, मालवाहक विमान और हेलीकॉप्टरों को उतारने में सक्षम है। यह ईएलएफ परियोजना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आपातकाल या युद्ध की स्थिति में यह सुविधा भारतीय वायु सेना के लिए एक मजबूत आधार के रूप में कार्य करेगी।