By एकता | Apr 01, 2026
हाल ही में यूरोपियन साइकिएट्री जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, टीवी देखने के समय में कटौती करने से डिप्रेशन का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के शोधकर्ताओं ने 65 हजार से ज्यादा लोगों पर 4 साल तक अध्ययन किया। इस रिसर्च में पाया गया कि रोजाना केवल 1 घंटा टीवी कम देखने से डिप्रेशन का जोखिम 11% तक घट सकता है। यदि इसे 2 घंटे कम कर दिया जाए, तो यह जोखिम 40% तक कम हो सकता है। इसका सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव 40 से 65 साल की उम्र के लोगों में देखा गया है।
टीवी और मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे दिमाग को दिन होने का भ्रम देती है। इससे शरीर में मेलाटोनिन नामक स्लीप हॉर्मोन कम बनता है, जिससे नींद आने में समस्या होती है और बॉडी क्लॉक बिगड़ जाती है। शारीरिक रूप से, टीवी के सामने घंटों बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और वजन बढ़ने लगता है, जो भविष्य में कई गंभीर बीमारियों को न्योता देता है।
ज्यादा टीवी देखने से व्यक्ति अकेलापन महसूस करने लगता है। बिंज-वॉचिंग की लत दिमाग को बार-बार नए कंटेंट की मांग करने पर मजबूर करती है। अक्सर स्क्रीन पर दूसरों की परफेक्ट लाइफ या डरावना कंटेंट देखने से इंसान में असुरक्षा की भावना और आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। इसके अलावा, टीवी देखते समय मंचिंग यानी जंक फूड खाते रहने से शरीर का शुगर लेवल बिगड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स बढ़ते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वयस्कों के लिए रोजाना 1 से 2 घंटे का स्क्रीन टाइम सुरक्षित है। एक्सरसाइज, वॉक या योग करने से शरीर में फील-गुड केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामिन बढ़ते हैं, जो मूड सुधारते हैं। टीवी के दुष्प्रभावों से बचने के लिए इसे बेडरूम से बाहर रखें, अंधेरे कमरे में टीवी न देखें और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले स्क्रीन बंद कर दें। टीवी देखते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना और 10 फीट की दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।
अगर टीवी देखने की आदत कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो इसे धीरे-धीरे कम करें। आप 30 दिन का नो टीवी चैलेंज ले सकते हैं या टीवी देखने के समय को किसी नई हॉबी (जैसे बुक रीडिंग) में बदल सकते हैं। घर में नो-स्क्रीन नियम लागू करें और टीवी के ऊपर अपने लक्ष्यों का पोस्टर चिपका दें, ताकि जब भी आप टीवी चलाएं, आपको अपने जरूरी कामों की याद आ जाए। टीवी का समय कम करने से न केवल नींद बेहतर होगी, बल्कि आपका फोकस और मानसिक ऊर्जा भी बढ़ेगी।