नया Tax Rule लागू: Company Car और Corporate Loan पर अब लगेगा ज्यादा टैक्स, जानें नए बड़े बदलाव।

By Ankit Jaiswal | Apr 01, 2026

नए वित्तीय साल की शुरुआत के साथ ही आम वेतनभोगी लोगों के लिए टैक्स से जुड़े नियमों में कुछ अहम बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर उनकी आय और खर्च पर पड़ने वाला है। बता दें कि एक अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू हो चुका है, हालांकि आयकर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन भत्तों और सुविधाओं में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं।

इसके अलावा मकान किराया भत्ता के दायरे को भी बढ़ाया गया है। अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों को अब बड़े शहरों की सूची में शामिल किया गया है, जहां कर्मचारियों को पचास प्रतिशत तक छूट का लाभ मिलेगा, जो पहले चालीस प्रतिशत तक सीमित था।

कंपनियों की ओर से मिलने वाले खाने-पीने के कूपन और भोजन सुविधा पर भी राहत दी गई है। अब प्रति भोजन दो सौ रुपये तक की राशि टैक्स फ्री होगी, जो पहले केवल पचास रुपये थी। साथ ही उपहार कूपन की सीमा भी बढ़ाकर पंद्रह हजार रुपये सालाना कर दी गई है।

बता दें कि परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भत्ते में भी बढ़ोतरी की गई है। अब यह सीमा 25000 रुपये प्रति माह या कुल भत्ते का 70 प्रतिशत, जो भी कम हो, कर दी गई है। वहीं कम ब्याज या बिना ब्याज वाले कॉरपोरेट लोन पर अब टैक्स लगेगा, हालांकि 2 लाख रुपये तक के छोटे कर्ज और चिकित्सा आपात स्थिति में लिए गए कर्ज को छूट दी गई है।

कुछ मामलों में टैक्स का बोझ भी बढ़ा है। कंपनी की गाड़ी के निजी इस्तेमाल पर अब ज्यादा टैक्स देना होगा। छोटी गाड़ियों पर 8000 रुपये प्रति माह और बड़ी गाड़ियों पर 10,000 रुपये प्रति माह का प्रावधान किया गया है, जिससे उच्च आय वर्ग के कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इसके साथ ही शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन पर लगने वाले टैक्स में भी बदलाव किया गया है। वायदा और विकल्प कारोबार पर टैक्स दर बढ़ाई गई है, जिससे ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों पर असर पड़ सकता है। वहीं शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि को अब पूंजीगत लाभ के रूप में टैक्स किया जाएगा।

टैक्स कलेक्शन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। विदेशी टूर पैकेज और विदेश में भेजी जाने वाली रकम पर टैक्स दर घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि शराब पर टैक्स बढ़ाया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, नए श्रम कानून भी वेतन संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। कंपनियों को अब कर्मचारियों के वेतन का कम से कम पचास प्रतिशत मूल वेतन के रूप में देना होगा, जिससे भविष्य निधि में योगदान बढ़ेगा और हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो नए नियमों में जहां कुछ भत्तों में राहत दी गई है, वहीं कुछ सुविधाओं पर टैक्स बढ़ाकर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है, जिससे कर्मचारियों को अपनी टैक्स प्लानिंग नए सिरे से करनी पड़ सकती है। 

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