By Ankit Jaiswal | Jun 19, 2026
वैश्विक बाजारों से आई एक खबर ने भारतीय शेयर बाजार का माहौल अचानक बदल दिया। दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों में शामिल एसेंचर द्वारा आय वृद्धि के अनुमान में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया, जहां सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एसेंचर अब चालू वित्तीय अवधि में 3 से 4 प्रतिशत वार्षिक आय वृद्धि की उम्मीद कर रही है। इससे पहले कंपनी ने 3 से 5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था। इस बदलाव ने निवेशकों को संकेत दिया है कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं की मांग अपेक्षा से कमजोर रह सकती है।
गौरतलब है कि एसेंचर दुनिया की सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी परामर्श और सेवा कंपनियों में गिनी जाती है। इसलिए उसके अनुमान को पूरे क्षेत्र की स्थिति का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। कंपनी द्वारा तिमाही नतीजों और नए अनुमान जारी किए जाने के बाद उसके शेयर में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद वैश्विक बाजारों में तकनीकी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ गया।
भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। शुरुआती कारोबार में राष्ट्रीय शेयर बाजार का सूचना प्रौद्योगिकी सूचकांक लगभग 6.5 प्रतिशत तक टूट गया। यह दिन की सबसे बड़ी क्षेत्रीय गिरावट रही। निवेशकों ने सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में बड़े पैमाने पर बिकवाली की।
बता दें कि इन्फोसिस के शेयर में सबसे अधिक लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में 6 प्रतिशत से अधिक, टेक महिंद्रा में 5 प्रतिशत से ज्यादा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में लगभग 5 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली। कोफोर्ज, विप्रो, एलटीआई माइंडट्री और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे।
इस बिकवाली का असर प्रमुख बाजार सूचकांकों पर भी पड़ा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स गिरावट के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में 800 अंकों से अधिक टूट गया। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी भी लगभग 216 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से अधिकांश शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि कुछ कंपनियों में तेजी भी देखने को मिली। एनटीपीसी, टाइटन, भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन फार्मा, पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट और ट्रेंट के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।
अन्य क्षेत्रों की बात करें तो वाहन, उपभोक्ता वस्तु, धातु, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, रियल एस्टेट, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, तेल एवं गैस तथा सीमेंट क्षेत्र के सूचकांकों में भी गिरावट देखी गई। हालांकि रसायन, स्वास्थ्य सेवा और दवा क्षेत्र के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी सेवाओं की मांग में कमजोरी बनी रहती है तो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय और नए कॉन्ट्रैक्ट पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं।
गौरतलब है कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप जैसे विदेशी बाजारों पर निर्भर करता है। ऐसे में वैश्विक कंपनियों के अनुमान और आर्थिक संकेतकों का सीधा प्रभाव भारतीय कंपनियों के कारोबार और शेयर बाजार की दिशा पर पड़ता है। फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाले महीनों में मांग की स्थिति और कंपनियों के आगामी नतीजों पर बनी हुई हैं।