म्यांमार Drone Warfare केस में NIA को 7 विदेशी नागरिकों के खिलाफ नहीं मिले Anti-India गतिविधियों के ठोस सबूत

By अभिनय आकाश | Sep 09, 2026

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को अब तक ऐसा कोई "ठोस सबूत" नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि म्यांमार ड्रोन वॉरफेयर मामले में आरोपी छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक भारत के खिलाफ गतिविधियों" में शामिल थे या उन्होंने भारतीय विद्रोही समूहों को ट्रेनिंग दी थी"। हालांकि, एजेंसी ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है और डेटा की बारीकी से जांच और विदेश (म्यांमार) में जांच की बात कही है। यह जानकारी तब सामने आई है जब एजेंसी ने 8 सितंबर को सात विदेशी नागरिकों--अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और यूक्रेनी नागरिकों हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर--के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के प्रावधानों के तहत चार्जशीट दाखिल की। ​​"हालांकि, अब तक की जांच में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह पता चले कि आरोपी भारत के खिलाफ गतिविधियों में शामिल थे या उन्होंने भारतीय विद्रोही समूहों (IIGs) को ट्रेनिंग दी थी।

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हालांकि, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत अपराधों की जांच अभी भी "जारी" है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन सात विदेशी नागरिकों का भारतीय विद्रोही समूहों से कोई संबंध था या उन्होंने भारत की सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियां की थीं। गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद NIA ने इस साल 13 मार्च को यह मामला दर्ज किया था। NIA की जांच से पता चला कि "आरोपी दिसंबर 2025 में भारत आए थे और बाद में गैर-कानूनी तरीके से भारत-म्यांमार सीमा पार करके म्यांमार के विक्टोरिया कैंप पहुंचे थे।

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