Nirjala Ekadashi 2026 Date: जानें कब है साल की सबसे बड़ी एकादशी, मिलेगा अक्षय पुण्य का वरदान

By दिव्यांशी भदौरिया | Jun 23, 2026

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। निर्जला एकादशी को अत्यंत पवित्र और सबसे उत्तम माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार,  इस एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों के समान फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

निर्जला एकादशी के दिन मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन सहित आदि चीजों का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि निर्जला एकादशी कब है और इस व्रत से पूरे साल की एकादशी का व्रत फल कैसे प्राप्त हो जाता है।

निर्जला एकादशी 2026 कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून, बुधवार के दिन शाम 6 बजकर 13 मिनट पर हो रहा है। हालांकि, अगले दिन यानी 25 जून, गुरुवार को शाम के समय 8 बजकर 10 मिनट तक एकादशी तिथि समाप्त हो रही है। इसके बाद ही द्वादशी तिथि का प्रारंभ होगा। उदया तिथि के अनुसार, 25 जून 2026, गुरुवार को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

-ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि आरंभ: 24 जून, बुधवार को शाम के 6 बजकर 13 मिनट पर

-ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून, गुरुवार को शाम के 8 बजकर 10 मिनट पर

-निर्जला एकादशी 2026: 25 जून, गुरुवार

निर्जला एकादशी से मिलता पूरे साल की एकादशी व्रत का फल

पौराणिक ग्रंथ पद्म पुराण के अनुसार, जब एक बार पांचों पांडवों में से भीमसेन ने वेद व्यासजी से पूछा कि मैंने आजतक एक भी व्रत नहीं किया है क्योंकि मेरे उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है। जिसके कारण से मुझे हमेशा भूख महसूस होती है। ऐसे में मुझे कोई ऐसा व्रत बताइए जो सिर्फ एख बार करने से मेरा भी उद्धार हो जाए और मुझे स्वर्ग लोक की प्राप्ति हो जाए। 

तब व्यासजी ने भीमसेन को ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली एकादशी को निर्जल रहकर व्रत रखने को कहा। यह एक ऐसा महीना है जो अधिक गर्म होता है उसमें निर्जल रहना अधिक कठिन होता है। इसीलिए इस एकादशी के व्रत को अत्यंत कठिन माना जाता है। व्यासजी ने बताया सिर्फ इस एक एकादशी के व्रत को करने से साल भर में पड़ने वाली सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है।

अक्षय फल की होती प्राप्ति

यदि साधक साल भर में पड़ने वाली एकादशी तिथि को व्रत नहीं रख पाता है, तो वह ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का व्रत कर सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए सभी पुण्य कार्य अक्षय हो जाते हैं। निर्जला एकादशी का व्रत भीमसेन ने भी रखा था, तभी इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को विधि-विधान के साथ रखा जाता है और पूजा करते द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया जाता है। 

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